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राजस्थान निकाय चुनाव पर गहलोत का बड़ा आरोप, पुलिस-प्रशासन और धनबल के इस्तेमाल का दावा

राजस्थान निकाय चुनाव पर गहलोत का बड़ा आरोप, पुलिस-प्रशासन और धनबल के इस्तेमाल का दावा

गहलोत का निकाय चुनावों पर बड़ा आरोप, पुलिस-प्रशासन और धनबल के इस्तेमाल का दावा

राजस्थान के निकाय चुनावों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार और चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 26 सितंबर को सामने आए उनके बयान के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि निकाय चुनावों में पुलिस, प्रशासनिक मशीनरी और धनबल का इस्तेमाल कर चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। ये गहलोत और कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं; इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पार्षदों पर दबाव का आरोप

गहलोत पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि कुछ कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाया गया तथा उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिए गए। 17 सितंबर को उन्होंने दावा किया था कि कुछ पार्षदों को डेढ़ करोड़ से ढाई करोड़ रुपये तक के ऑफर दिए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस और सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए किया गया। कांग्रेस नेताओं ने राजस्थान के कई निकायों में प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए शिकायतें भी की थीं।

भरतपुर का मुद्दा भी उठाया

गहलोत ने भरतपुर के मेयर चुनाव को लेकर भी सवाल उठाए। एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने सवाल किया कि भाजपा के पास अपेक्षाकृत कम पार्षद होने के बावजूद उसका बोर्ड कैसे बना। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन के दबाव के कारण एक उम्मीदवार चुनावी मैदान से हट गया, जिससे निर्विरोध जीत का रास्ता बना। हालांकि, प्रशासनिक दबाव वाले इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

BJP की ओर से आरोपों पर प्रतिक्रिया

इन आरोपों को भाजपा ने स्वीकार नहीं किया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस के पार्षद भाजपा के काम से प्रभावित होकर उसका समर्थन करना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने से क्यों रोका जाए।

निकाय चुनावों के बाद राजस्थान में मेयर और चेयरमैन पदों के गठन को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज रहे हैं। ऐसे में गहलोत के ताजा बयान ने स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया और पार्षदों की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस को फिर गरमा दिया है।


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