राहुल गांधी ने कहा: “देश के बच्चों को घुट–घुट कर सांस लेने पर मजबूर क्यों?” — PM मोदी की चुप्पी पर उठे सवाल
- byAman Prajapat
- 28 November, 2025
देश की राजधानी, New Delhi — इस साल फिर से बदलती ठंडी हवाओं, बढ़ते धुएँ-धूल और नमी के कारण, जहरीली हवा की चादर में डूब चुकी है। Central Pollution Control Board (CPCB) और अन्य मॉनिटरिंग एजेंसियों की रिपोर्ट बता रही है कि राजधानी का वायु-गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार ‘बहुत खराब’ और कई इलाकों में ‘गंभीर’ श्रेणी में जा चुका है।
जहाँ धुंध रोजमर्रा की सड़कों, चौराहों, स्कूलों, गलियों — सब पर बढ़ती जा रही है, वहीं सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, बच्चों व बुजुर्गों में श्वसन समस्याएँ — ये शिकायतें सिर्फ आम लोग नहीं, बल्कि उनके परिवार, दोस्त और पड़ोसी भी साझा कर रहे हैं।
लेकिन समस्या सिर्फ प्रदूषण तक सीमित नहीं है — इसका राजनीतिक, मानवतावादी और भविष्य-संदर्भ है। और इसी पर कल जब एक प्रमुख नेता ने आवाज़ उठाई, तो हवा ही नहीं, हिली सरकार की नींद भी।
राहुल गांधी की आवाज़: “चुप्पी क्यों?”
नवीनतम बयानों में, Rahul Gandhi ने Narendra Modi — देश के प्रधानमंत्री — की “चुप्पी” पर तीखा सवाल उठाया है।
उन्होंने माँ-बच्चों और नागरिकों की पीड़ा सामने रखी — “हर माँ कहती है कि उनका बच्चा जहरीली हवा में पल रहा है। वे डर, थकावट और गुस्से में हैं।”
उन्होंने पूछा: “मोदी जी, हमारे बच्चों को घुटने क्यों लग रहा है, और आप चुप्पी क्यों बनाए हुए हैं? आपकी सरकार में इतनी मजबूरी देख रहा है — योजना क्यों नहीं है, जवाबदेही क्यों नहीं है?”
उन्होंने संसद में मुद्दे की चर्चा और तत्काल, लागू-योग्य (enforceable) एक्शन प्लान की मांग की — ताकि इस स्वास्थ्य आपात-स्थिति (health emergency) से निपटा जा सके।
“हमारे बच्चों को बहाने नहीं, साफ़ हवा चाहिए,” — उन्होंने साफ कहा।
उनका कहना है कि सिर्फ ट्वीट या भाषण से काम नहीं चलेगा — ज़रूरत है, ठोस, धरातलीय कार्रवाई की।
दिल्ली की हवा — आज की सच्चाई
पिछले 2–3 हफ्तों से राजधानी का AQI लगातार 'बहुत खराब' या 'गंभीर' श्रेणी में बना हुआ है। कई इलाकों में AQI 400–500 के पार दर्ज हुआ है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
मौसम वैज्ञानिक और प्रदूषण विशेषज्ञों का कहना है कि इस वक्त प्रदूषण की स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है — ख़ासकर ठंडी हवाओं और हवा के स्थिर रहने के कारण।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ऐसे प्रदूषण में, खासकर बच्चों, बुज़ुर्गों, अस्थमा या हृदय रोग वाले लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच करनी चाहिए।
आम नागरिकों की ज़िंदगी सुस्त होती जा रही है — जागते ही, मास्क, हवा में जलन, घरों में बंद रहना, अस्पतालों में भीड़, स्कूलों में छुट्टियाँ — यह सब सामान्य हो चला है।
सवाल: अगर सबसे ऊपर बोले नही, तो नीचे कैसे बदलेगी हवा?
यह वह सवाल है जो सिर्फ राहुल गांधी नहीं, बल्कि बहुत से लोगों का है। क्योंकि:
जब गृहमंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, नीतिनिर्माण वाले लोग — जो देश के कानून, संसाधन, बजट तय करते हैं — चुप रहेंगे, तो हवा कैसे बदलेगी?
अगर एक्शन प्लान सिर्फ कागजों पर रहा, या बहाने बदलते रहेंगे, तो हर साल वही कहानी — जहरीली धुंध, हॉस्पिटल, मास्क, सांस — फिर से दोहराई जाएगी।
क्या दिल्ली सिर्फ एक शहर है? नहीं — यह देश की राजधानी है। वहां की हवा, वहां के लोग, वहां की राजनीति, हमारे पूरे देश की तस्वीर है। अगर दिल्ली ज़हरीली हवा में जकड़ी रहेगी, तो इसका असर अमीर–गरीब, बड़े–छोटे, सबपर पड़ेगा।

ज़रूरत है — साफ़ हवा, स्पष्ट जवाबदेही
अगर मैं आज दिल्ली की सड़कों से आवाज़ उठाऊँ — तो वो यह होगी:
तुरंत संसद में वायु-प्रदूषण पर विशेष सत्र लगना चाहिए। सब पार्टियों को मिल कर, वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, नागरिकों को साथ लेकर — एक ठोस, निष्पाद्य (implementable) Action Plan बनना चाहिए।
प्रदूषण के स्रोत: वाहनों, निर्माण-धूल, खुले अवशिष्ट जलने, उद्योग, ठंडी हवाओं आदि — इन सब पर सख्त निगरानी और कड़े नियम लागू होने चाहिए।
स्वास्थ्य संकट के मद्देनज़र — स्कूलों, अस्पतालों, बुज़ुर्गों, अस्थमा व सांस से जुड़ी बीमारियों वालों के लिए राहत-योजना होनी चाहिए। मास्क, वायु-शुद्धिकरण, जागरूकता — सिर्फ दिखावा नहीं वास्तविक।
जनता को सिर्फ बहाना नहीं चाहिए; विकल्प चाहिए — साफ़ हवा, स्वच्छ जीवन, स्वस्थ भविष्य।
निष्कर्ष
देखो, अगर हम इतिहास की किताबों में लौटकर देखें, तो जानेंगे कि कभी-कभी वही समय सबसे अहम बन जाता है, जब आवाज़ उठती है — और हवा साफ़ करने का काम शुरू होता है। आज दिल्ली की हवा जहरीली है, बच्चों की साँसों से ग़लत खुशबू आ रही है, और मौन वही बना हुआ है जिसे सुनना चाहिए था।
अगर नेता चुप हैं, जनता चुप हो जाए — तो कौन बोलेगा? अगर हम सब आज मिल कर, ज़ोर से न कहें: “हमें साफ हवा चाहिए”, तो हवा कभी नहीं बदलेगी।
राहुल गांधी का सवाल — सिर्फ राजनीतिक नहीं, मानवीय और ज़रूरी है। हवा हमारे लिए, हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए है।
अगर चाहो — मैं इस लेख को और लंबा बना सकता हूँ — करीब 2000–3000 शब्द का — जिसमें प्रदूषण के आँकड़े, विशेषज्ञों की राय, नागरिकों की कहानी, सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित उपाय — सब होंगे। करना चाहोगे?
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
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