दिल्ली में राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसद हिरासत में, चुनाव आयोग के मुद्दे पर सड़क पर उतरा INDIA ब्लॉक
- bySanjay
- 07 October, 2026
दिल्ली में विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन, राहुल गांधी समेत कई सांसद हिरासत में
नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली में विपक्षी दलों का प्रदर्शन बुधवार को एक बार फिर तेज हो गया। INDIA ब्लॉक के नेताओं और सांसदों ने जंतर-मंतर की ओर प्रदर्शन के लिए आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बनी और पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी सांसदों और नेताओं को हिरासत में ले लिया।
जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहा था विपक्षी दलों का मार्च
रिपोर्टों के मुताबिक विपक्षी सांसद जंतर-मंतर पर धरना देने के लिए आगे बढ़ रहे थे। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़ा था। विपक्षी दल उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद राहुल गांधी और अन्य सांसदों ने वहीं विरोध शुरू कर दिया। कुछ देर बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया और कई नेताओं को हिरासत में लिया।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया
इस कार्रवाई के दौरान राहुल गांधी को पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से हटाकर वाहन में बैठाया। प्रियंका गांधी वाड्रा को भी महिला पुलिसकर्मियों ने वहां से हटाया और हिरासत में लिया। कई अन्य विपक्षी सांसदों को भी पुलिस वाहनों में ले जाया गया।
रिपोर्टों के अनुसार यह लगातार दूसरा दिन था जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को चुनाव आयोग से जुड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया। इससे पहले 6 अक्टूबर को भी विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की ओर मार्च करने की कोशिश की थी और लंबे धरने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था।
विपक्ष की मुख्य मांग क्या है?
विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन और SIR प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल हैं। विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर देख रहा है और चुनाव आयोग से इन मुद्दों पर जवाब मांग रहा है।
विपक्ष की ओर से लगाए गए इन आरोपों को चुनाव आयोग और सरकार ने स्वीकार नहीं किया है। चुनाव आयोग का कहना है कि बहु-सदस्यीय आयोग में मतभेद होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है और उसके फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
चुनाव आयोग ने बैठक को लेकर क्या कहा?
6 अक्टूबर के घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा था कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल की ओर से आयोग के साथ बैठक के लिए औपचारिक अनुरोध नहीं मिला था। आयोग के मुताबिक इसके बाद दिल्ली पुलिस के माध्यम से सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के मिलने की जानकारी मिली। आयोग ने यह भी कहा कि लगभग 240 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को संसद भवन एनेक्सी में मिलने का प्रस्ताव उसके निर्धारित प्रोटोकॉल से अलग था।
आयोग ने यह भी कहा कि वह प्रतिनिधिमंडल से ज्ञापन लेने के लिए अपने वरिष्ठ अधिकारी को भेजने के विकल्प पर विचार कर रहा था, लेकिन यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक और संस्थागत विवाद और गहरा गया है।
प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी
6 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद 7 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने फिर से प्रदर्शन का ऐलान किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठक के बाद जंतर-मंतर पर धरने की योजना बनाई गई। इसके बाद राहुल गांधी सहित कई सांसद वहां पहुंचने के लिए आगे बढ़े। पुलिस ने उन्हें रोक दिया और बाद में हिरासत में ले लिया।
रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शन में विपक्षी दलों के कई सांसद शामिल रहे। विपक्ष का कहना है कि वह मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाता रहेगा।
एक दिन पहले भी हुआ था बड़ा टकराव
इससे पहले 6 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने संसद मार्ग से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय तक धरना दिया। घटनाक्रम के दौरान कुछ विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर तक पहुंच गए और वहां भी धरना जारी रहा। बाद में पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को हिरासत में लिया।
7 अक्टूबर को भी प्रदर्शन जारी रहने के कारण दिल्ली के मध्य क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले रोक दिया।
आकाशवाणी भवन मामले में FIR भी दर्ज
इस बीच 7 अक्टूबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं के खिलाफ आकाशवाणी भवन परिसर में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में FIR दर्ज किए जाने की खबर भी सामने आई। पुलिस की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई पिछले दिन के प्रदर्शन से जुड़ी बताई जा रही है।
इस FIR के बाद राजनीतिक विवाद और बढ़ गया है। कांग्रेस और विपक्षी नेता प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि पुलिस की कार्रवाई कानून-व्यवस्था और निर्धारित प्रदर्शन नियमों के संदर्भ में सामने आई है।
अब आगे क्या?
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों की हिरासत के बाद भी विपक्ष ने अपने आंदोलन को जारी रखने के संकेत दिए हैं। वहीं चुनाव आयोग और सरकार की ओर से विपक्ष द्वारा लगाए गए चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
दिल्ली में हुए इन लगातार प्रदर्शनों ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस को राष्ट्रीय स्तर पर ला दिया है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और विवाद का केंद्र चुनावी प्रक्रिया से जुड़े तथ्य, SIR की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के साथ विपक्ष की बातचीत बना हुआ है।
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