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कैस्पियन सागर में दशकों से घट रहा पानी, अब समुद्र के बीच दिखा नया द्वीप; वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी

कैस्पियन सागर में दशकों से घट रहा पानी, अब समुद्र के बीच दिखा नया द्वीप; वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी

कैस्पियन सागर को लेकर पर्यावरण और भूगोल की दुनिया से एक दिलचस्प लेकिन चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। कजाकिस्तान के तट के पास उत्तरी कैस्पियन सागर में पानी पीछे हटने के कारण समुद्र के भीतर नया भू-भाग दिखाई दिया है, जिसे हालिया हवाई सर्वेक्षण के दौरान रिकॉर्ड किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक यह घटना अकेली नहीं है, बल्कि उत्तरी कैस्पियन क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से दिखाई दे रहे जलस्तर में बदलाव का हिस्सा है।

समुद्र के भीतर कैसे दिखाई देने लगा नया द्वीप?

कैस्पियन सागर का उत्तरी और उत्तर-पूर्वी हिस्सा अपेक्षाकृत उथला है। इस क्षेत्र में पानी की सामान्य गहराई कई जगहों पर केवल 3 से 6 मीटर के आसपास है। ऐसे में जलस्तर में अपेक्षाकृत छोटी गिरावट भी समुद्र के तल के बड़े हिस्से को उजागर कर सकती है और तटरेखा कई किलोमीटर पीछे जा सकती है।

हालिया हवाई सर्वेक्षण में कुलाली (Kulaly) द्वीप के पास एक नया भू-भाग दिखाई दिया। पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार पिछले चार-पांच वर्षों में उत्तरी कैस्पियन क्षेत्र में ऐसे कई नए उभरे हुए भू-भाग देखे जा चुके हैं।

30 साल में करीब 2.5 मीटर नीचे गया जलस्तर

कजाकिस्तान के क्षेत्र में कैस्पियन सागर का जलस्तर पिछले लगभग तीन दशकों में करीब 2.5 मीटर नीचे जाने की रिपोर्ट सामने आई है। हालिया रिपोर्टों में उत्तर-पूर्वी कैस्पियन के सर्वेक्षित हिस्से में पानी से ढके क्षेत्र में भी बड़ी कमी दर्ज किए जाने की बात कही गई है।

वैज्ञानिक अध्ययनों में भी 1990 के दशक के मध्य से कैस्पियन सागर के जलस्तर में गिरावट की पुष्टि हुई है। 2020 से 2023 के बीच उत्तरी कैस्पियन में जलस्तर में करीब 0.64 मीटर की गिरावट दर्ज की गई थी।

सिर्फ नया द्वीप बनना ही कहानी नहीं

दिलचस्प बात यह है कि कैस्पियन सागर में जलस्तर घटने से कुछ जगह नए द्वीप या उभरे हुए भू-भाग दिखाई दे रहे हैं, जबकि दूसरी जगह पुराने द्वीप मुख्य भूमि से जुड़ रहे हैं। वैज्ञानिक शोध के अनुसार उत्तरी कैस्पियन में द्वीपों का विकास एक चक्र जैसा हो सकता है—पहले नया भू-भाग पानी से बाहर आता है, फिर उसका आकार बढ़ता है और जलस्तर लगातार नीचे जाने पर वह मुख्य भूमि से जुड़ सकता है।

2026 में भी वैज्ञानिकों ने दर्ज किए बदलाव

अप्रैल 2026 में हुए एक वैज्ञानिक अभियान में उत्तरी कैस्पियन में मौजूदा और नए बन रहे द्वीपों के क्षेत्रफल में बदलाव दर्ज किए गए। शोधकर्ताओं ने बताया कि Chistoy Banki Island का क्षेत्रफल 2019 की तुलना में लगभग दोगुना हो गया, जबकि Tbilisi Bank पर बने एक द्वीप का क्षेत्रफल 2025 की तुलना में करीब तीन गुना बढ़ा। वैज्ञानिक अभियान ने कैस्पियन के जलस्तर में लगातार गिरावट के रुझान की भी पुष्टि की।

पर्यावरण पर क्या पड़ेगा असर?

कैस्पियन सागर में हो रहे बदलाव का असर केवल नक्शे या भूगोल तक सीमित नहीं है। जलस्तर घटने से मछलियों, पक्षियों और कैस्पियन सील जैसे जीवों के आवास प्रभावित हो सकते हैं। वैज्ञानिक शोध में उत्तरी कैस्पियन में सील के रहने और प्रजनन से जुड़े क्षेत्रों में भी बदलाव दर्ज किए गए हैं।

इसके अलावा समुद्र के सिकुड़ने से बंदरगाह, जहाजरानी, मत्स्य उद्योग और तटीय क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों पर भी दबाव बढ़ सकता है। क्षेत्रीय अधिकारियों ने भी जलस्तर में गिरावट, बढ़ते तापमान, अधिक वाष्पीकरण और नदियों से आने वाले पानी में कमी को महत्वपूर्ण कारकों के रूप में बताया है।

क्या पूरा कैस्पियन सागर सूखने की ओर है?

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा कहना सही नहीं होगा कि पूरा कैस्पियन सागर जल्द सूख जाएगा। सबसे ज्यादा जोखिम उत्तरी और उथले हिस्सों में है, जबकि मध्य और दक्षिणी कैस्पियन अपेक्षाकृत ज्यादा गहरे हैं। फिर भी उत्तरी क्षेत्र में लगातार घटता जलस्तर एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय बदलाव माना जा रहा है।

नए द्वीप का सामने आना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कैस्पियन सागर में चल रहे बदलाव का जमीन पर दिखाई देने वाला संकेत है। वैज्ञानिक अब इस क्षेत्र में जलस्तर, तटरेखा और समुद्री पारिस्थितिकी में हो रहे बदलावों की लगातार निगरानी कर रहे हैं।


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