नेस्ले का बड़ा कदम: ज़हरीले तत्वों के खतरे के चलते दुनिया भर में शिशु फ़ॉर्मूला रिकॉल, भारत सुरक्षित
- byAman Prajapat
- 09 January, 2026
सुबह की चाय ठंडी पड़ जाती है जब खबर ऐसी हो। बच्चों के खाने की बात हो, तो दिल सबसे पहले कांपता है—और यही वजह है कि नेस्ले का हालिया फैसला पूरी दुनिया में सुर्खियां बना। सदियों से भरोसे का नाम रहा ब्रांड, जिसने पीढ़ियों को पाला, उसी ने साफ़-साफ़ कहा: कुछ बैचों में जोखिम है, इसलिए उन्हें वापस लिया जा रहा है। बात घुमाई नहीं गई। सीधा, सादा, ज़िम्मेदाराना।
क्या हुआ है असल में?
नेस्ले ने वैश्विक स्तर पर अपने कुछ इन्फेंट फ़ॉर्मूला बैचों को रिकॉल करने की घोषणा की है। वजह—संभावित टॉक्सिन (विषाक्त तत्व) का जोखिम। कंपनी का कहना है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है, ताकि शिशुओं की सुरक्षा में कोई समझौता न हो। जहां शक की गुंजाइश होती है, वहां जोखिम नहीं लिया जाता—यही पुराने ज़माने की समझ है, और यही सही भी।
भारत को लेकर क्या कहा गया?
यहां राहत की सांस है। नेस्ले ने साफ़ किया है कि भारत में बेचे जा रहे उत्पाद इस रिकॉल का हिस्सा नहीं हैं। मतलब, भारतीय बाज़ार में उपलब्ध शिशु फ़ॉर्मूला सुरक्षित है और गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है। कंपनी ने बताया कि भारत में सप्लाई चेन, परीक्षण प्रक्रिया और नियामकीय मानक अलग और सख़्त हैं—और वही ढाल बने हैं।
टॉक्सिन का मतलब क्या?
सीधी भाषा में—ऐसा तत्व जो शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है, खासकर नवजातों के लिए। शिशुओं का शरीर नाज़ुक होता है; उनकी सुरक्षा में ज़ीरो टॉलरेंस ही नियम है। यही वजह है कि कंपनियां अक्सर शक होते ही रिकॉल करती हैं, भले ही जोखिम सीमित क्यों न हो।
रिकॉल क्यों ज़रूरी होता है?
पुराने लोग कहते थे—“पहले रोकथाम, फिर पछतावा।” फूड इंडस्ट्री में यही मंत्र चलता है। रिकॉल का मतलब यह नहीं कि नुकसान हो ही गया है; कई बार यह संभावना के आधार पर उठाया गया सुरक्षा कदम होता है। नेस्ले का यह फैसला भी उसी स्कूल ऑफ़ थॉट से आता है—पहले बच्चों की सुरक्षा, बाकी सब बाद में।
अभिभावकों के लिए सलाह
अफ़वाहों से दूर रहें, आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
भारत में खरीदे गए नेस्ले उत्पादों को लेकर घबराने की ज़रूरत नहीं है।
पैक पर दिए गए निर्देशों और एक्सपायरी डेट पर ध्यान दें—यह पुरानी आदतें हैं, और काम की हैं।
किसी भी शंका में डॉक्टर या कंपनी के कस्टमर केयर से संपर्क करें।

कंपनी की प्रतिक्रिया और पारदर्शिता
नेस्ले ने कहा है कि वह नियामकों के साथ मिलकर काम कर रही है और उपभोक्ताओं को समय-समय पर अपडेट दे रही है। आज के ज़माने में भरोसा शब्दों से नहीं, एक्शन से बनता है—और रिकॉल उसी एक्शन का नाम है।
बड़ा सवाल: भरोसा टूटता है या मज़बूत होता है?
सच बोलूं? ऐसे कदम भरोसे को तोड़ते नहीं, टेस्ट करते हैं। और जब कोई कंपनी बिना टाल-मटोल के ज़िम्मेदारी लेती है, तो भरोसा और गहरा होता है। Gen Z इसे कहेगी—“Accountability is cool.” और पुराने लोग कहेंगे—“ईमानदारी सबसे बड़ी पूंजी।”
आगे क्या?
जांच जारी रहेगी, अपडेट आते रहेंगे। लेकिन फिलहाल तस्वीर साफ़ है—ग्लोबल रिकॉल है, भारत सुरक्षित है। घबराने की नहीं, जागरूक रहने की ज़रूरत है।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
जयपुर मे सोने और चां...
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