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केदारनाथ में 5 महीने में 50.30 टन कचरा, करीब 20 टन प्लास्टिक ने बढ़ाई पर्यावरण की चिंता

केदारनाथ में 5 महीने में 50.30 टन कचरा, करीब 20 टन प्लास्टिक ने बढ़ाई पर्यावरण की चिंता

केदारनाथ में 5 महीने में 50.30 टन कचरा, करीब 20 टन प्लास्टिक ने बढ़ाई हिमालय की चिंता

उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में इस साल तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ कचरे की मात्रा भी तेजी से बढ़ी है। नगर पंचायत से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच केदारनाथ में 50.30 मीट्रिक टन कचरा दर्ज किया गया। यह मात्रा 2025 के पूरे यात्रा सीजन में दर्ज कचरे से ढाई गुना से भी अधिक है।

पांच महीनों में इतना कचरा कैसे बढ़ा?

नगर पंचायत के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में 1.7 मीट्रिक टन कचरा दर्ज हुआ। मई में यह आंकड़ा अचानक बढ़कर 16.3 टन हो गया। इसके बाद जून में 11.5 टन, जुलाई में 10.5 टन और अगस्त में 10.3 टन कचरा दर्ज किया गया। यानी मई में कचरे की मात्रा सबसे ज्यादा रही।

पिछले तीन साल के पूरे आंकड़ों से ज्यादा

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2026 के सिर्फ पांच महीनों में दर्ज 50.30 टन कचरा पिछले तीनों वर्षों के पूरे साल के आंकड़ों से अधिक है।

  • 2023: 32.58 मीट्रिक टन
  • 2024: 26.10 मीट्रिक टन
  • 2025: 21.40 मीट्रिक टन
  • अप्रैल-अगस्त 2026: 50.30 मीट्रिक टन

2026 का पांच महीने का आंकड़ा 2023 के पूरे साल से करीब 54% और 2025 के आंकड़े से करीब 135% अधिक है।

करीब 20 टन प्लास्टिक कचरा

कचरे में प्लास्टिक की मात्रा भी बड़ी चिंता का विषय है। नगर पंचायत के अनुसार 2026 में अब तक करीब 20 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा दर्ज किया गया। इसमें से 18.5 टन यानी 92.5 प्रतिशत प्लास्टिक का प्रसंस्करण किया जा चुका है, जबकि करीब 1.5 टन अभी बाकी है।

करीब 15 लाख श्रद्धालु पहुंचे

कचरे में इस वृद्धि के बीच केदारनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी अधिक रही। उत्तराखंड पर्यटन विभाग की यात्रा शाखा के आंकड़ों के अनुसार, 25 सितंबर तक करीब 15.42 लाख श्रद्धालु केदारनाथ पहुंच चुके थे।

हालांकि RTI में मिले आंकड़े यह स्पष्ट नहीं करते कि कुल कचरे में कितना हिस्सा सीधे श्रद्धालुओं से आया और कितना स्थानीय दुकानों, व्यवसायों या अन्य स्रोतों से।

लैंडफिल व्यवस्था पर भी दबाव

नगर पंचायत ने बताया कि केदारनाथ में लैंडफिल के लिए कुल 30,000 वर्ग फुट क्षेत्र निर्धारित है, जिसमें करीब 28,000 वर्ग फुट क्षेत्र शेष बताया गया है। पिछले पांच वर्षों में वहां चार लैंडफिल बनाए जाने की जानकारी भी RTI जवाब में दी गई है।

हिमालयी क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए इतनी बड़ी मात्रा में कचरे का पैदा होना और उसका प्रबंधन एक महत्वपूर्ण चुनौती बन रहा है।

तीर्थस्थल के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी

केदारनाथ देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक होने के साथ-साथ बेहद संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में स्थित है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में बढ़ती भीड़ के साथ कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को भी उसी अनुपात में मजबूत करना जरूरी हो जाता है।

ताजा आंकड़े एक तरफ केदारनाथ में बढ़ती यात्रा गतिविधि को दिखाते हैं, तो दूसरी तरफ यह सवाल भी सामने रखते हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में पैदा होने वाले कचरे का लंबे समय तक पर्यावरण पर क्या असर पड़ सकता है।


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