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ईरान की पड़ोसी देशों को बड़ी चेतावनी, अमेरिका-इजरायल को अपनी जमीन इस्तेमाल करने से रोकें; बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

ईरान की पड़ोसी देशों को बड़ी चेतावनी, अमेरिका-इजरायल को अपनी जमीन इस्तेमाल करने से रोकें; बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने एक बार फिर अपने पड़ोसी देशों को कड़ा संदेश दिया है। 4 अक्टूबर 2026 को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पड़ोसी देशों से अपील की कि वे अमेरिका और इजरायल को अपनी जमीन, सैन्य ठिकानों या अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए न करने दें। ईरान का कहना है कि क्षेत्रीय देशों को अच्छे पड़ोसी संबंधों की जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए।

ईरान की ओर से आया यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब क्षेत्र में पहले से ही सैन्य और कूटनीतिक तनाव बना हुआ है। बघाई ने कहा कि तेहरान ने कुछ क्षेत्रीय देशों की भूमिका को लेकर अपनी चिंताएं स्पष्ट कर दी हैं और वह इस मुद्दे को आगे भी उठाता रहेगा।

पड़ोसी देशों को क्या संदेश दिया गया?

ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, तेहरान चाहता है कि पड़ोसी देश अपनी क्षेत्रीय सुविधाओं का इस्तेमाल ऐसी किसी कार्रवाई के लिए न होने दें जिसे ईरान अपने खिलाफ सैन्य गतिविधि मानता है।

ईरान विशेष रूप से इस बात पर जोर दे रहा है कि क्षेत्र के देशों की जमीन और सुविधाएं अमेरिका या इजरायल की गतिविधियों का माध्यम न बनें। यह संदेश खाड़ी क्षेत्र के उन देशों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी या रणनीतिक सुविधाएं हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी ईरान का कड़ा रुख

इसी बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। 4 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने कहा है कि जलडमरूमध्य को तब तक दोबारा नहीं खोला जाएगा, जब तक अमेरिका के साथ जून के समझौते से जुड़ी सात शर्तें पूरी नहीं होतीं।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने कहा कि तेहरान की स्थिति स्पष्ट है और शर्तों की पूर्ति के बाद ही जलमार्ग को खोलने का फैसला किया जाएगा। इस मुद्दे पर कतर मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचा रहा है।

अमेरिका को भी ईरान का संदेश

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को राजनयिकों और विदेशी प्रतिनिधियों से बातचीत में कहा कि ईरान कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है, लेकिन यदि दोबारा सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाता है तो ईरान पहले की तुलना में अधिक मजबूत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार है।

इससे साफ है कि तेहरान एक तरफ बातचीत और कूटनीति का विकल्प खुला रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ सैन्य दबाव की स्थिति में अपनी प्रतिक्रिया को लेकर भी चेतावनी दे रहा है।

एयरपोर्ट और उड़ानों को लेकर पहले भी दे चुका है चेतावनी

ईरान की पड़ोसी देशों को चेतावनी बिल्कुल नई नहीं है। सितंबर में ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े मोहसेन रेजाई ने चेतावनी दी थी कि यदि पड़ोसी देश अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत ईरानी उड़ानों को रोकने में सहयोग करते हैं, तो ईरान उनके हवाई अड्डों के संचालन को प्रभावित करने की कार्रवाई कर सकता है।

यह बयान उस समय आया था जब अमेरिका की ओर से ईरानी एयरलाइनों और उनसे जुड़े विमानन नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया जा रहा था। इसके बाद कुछ देशों में ईरान से जुड़ी उड़ानों पर भी असर पड़ा था।

क्यों महत्वपूर्ण है यह चेतावनी?

ईरान की ताजा चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता। यहां तेल और गैस की आपूर्ति, समुद्री व्यापार, विमानन और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग जैसी गतिविधियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। रिपोर्टों के अनुसार संघर्ष से पहले इस मार्ग से वैश्विक तेल और LNG आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता था। इसलिए इस क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव रहने पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री परिवहन पर भी असर पड़ सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल ईरान की ओर से एक साथ दो संदेश सामने आ रहे हैं—एक तरफ तेहरान कूटनीतिक समाधान की संभावना बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह अमेरिका और उसके सहयोगियों को सैन्य कार्रवाई के खिलाफ कड़ी चेतावनी दे रहा है।

पड़ोसी देशों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें एक तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को संभालना है और दूसरी तरफ ईरान के साथ क्षेत्रीय संबंधों और सुरक्षा हितों को ध्यान में रखना है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कूटनीतिक बातचीत के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जा सकेगा और क्या क्षेत्रीय देश ईरान की इस नई चेतावनी के बाद अपनी भूमिका को लेकर कोई बदलाव करते हैं।


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