IND vs NZ | दुआ और प्रैक्टिस: टी20 गेंदबाज़ी में अर्शदीप सिंह का मंत्र
- bykrish rathore
- 22 January, 2026
भारत और न्यूजीलैंड के बीच जारी टी20 सीरीज़ के दौरान भारतीय टीम के बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ अर्शदीप सिंह ने अपनी गेंदबाज़ी को लेकर एक सादा लेकिन प्रभावशाली सोच साझा की है। अर्शदीप का मानना है कि टी20 जैसे दबाव भरे फॉर्मेट में सफलता का असली मंत्र है — दुआ, नियमित अभ्यास और मानसिक संतुलन।
अर्शदीप सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी गेंदबाज़ी की लय इस बात पर निर्भर नहीं करती कि वह हर मैच में खेल रहे हैं या नहीं। उनके अनुसार, अगर खिलाड़ी मानसिक रूप से तैयार है और अपनी तैयारी पर भरोसा रखता है, तो मौके मिलने पर प्रदर्शन अपने आप सामने आ जाता है।
बाएं हाथ के इस तेज़ गेंदबाज़ ने कहा, “मैं रोज़ प्रैक्टिस करता हूं, भगवान से दुआ करता हूं और बस अपना काम करता हूं। अगर मुझे मैच खेलने का मौका मिलता है, तो मैं अपना 100 प्रतिशत देता हूं। अगर नहीं मिलता, तो भी मेरी तैयारी वही रहती है।”
अर्शदीप की यह सोच टी20 क्रिकेट की वास्तविकता को दर्शाती है, जहां खिलाड़ियों को हर मैच खेलने की गारंटी नहीं होती। टीम संयोजन, पिच की स्थिति और विपक्षी बल्लेबाज़ों के अनुसार बदलाव आम बात है। ऐसे में मानसिक रूप से स्थिर रहना किसी भी गेंदबाज़ के लिए बेहद जरूरी हो जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में अर्शदीप सिंह भारत के सबसे भरोसेमंद टी20 गेंदबाज़ों में शामिल हुए हैं, खासकर डेथ ओवर्स में। उनकी यॉर्कर डालने की क्षमता और दबाव में शांत रहने का स्वभाव उन्हें बाकी गेंदबाज़ों से अलग बनाता है। अर्शदीप का कहना है कि वह हर मैच को नया मानते हैं और पिछले प्रदर्शन का बोझ अपने ऊपर नहीं लेते।
उन्होंने यह भी माना कि टी20 क्रिकेट में गलती की गुंजाइश बेहद कम होती है, लेकिन अगर गेंदबाज़ डर के साथ खेलता है, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। “अगर रन पड़ भी जाएं, तो जरूरी है कि आप अपनी योजना पर भरोसा रखें,” उन्होंने कहा।
भारत और न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीमों के बीच मुकाबलों में गेंदबाज़ों की भूमिका और भी अहम हो जाती है। अर्शदीप का अनुभव और मानसिक मजबूती टीम इंडिया के लिए बड़ी ताकत मानी जा रही है, खासकर आगामी बड़े टूर्नामेंट्स को देखते हुए।
अंत में, अर्शदीप सिंह का यह मंत्र — दुआ, प्रैक्टिस और धैर्य — न सिर्फ युवा गेंदबाज़ों के लिए सीख है, बल्कि यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टिके रहने के लिए सिर्फ स्किल नहीं, बल्कि मजबूत सोच भी उतनी ही जरूरी है।

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**Nitish Rana Backs...
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