ITR भरने के लिए सिर्फ 3 दिन बाकी! डेडलाइन चूके तो ₹5,000 तक लेट फीस, जानें पूरी जानकारी
- bypari rathore
- 29 August, 2026
Income Tax Return: ITR भरने के लिए सिर्फ 3 दिन बाकी, चूके तो लगेगी ₹5,000 तक लेट फीस; जानें पूरी जानकारी
नई दिल्ली। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी खबर है। आकलन वर्ष 2026-27 (AY 2026-27) के लिए बिना लेट फीस ITR दाखिल करने की समयसीमा नजदीक आ गई है। अगर किसी टैक्सपेयर को 31 अगस्त 2026 तक अपना रिटर्न दाखिल करना है, तो अब उसके पास केवल कुछ दिन का समय बचा है।
समयसीमा के बाद भी ITR दाखिल किया जा सकता है, लेकिन इसे Belated ITR माना जाएगा। ऐसी स्थिति में टैक्स कानून के तहत लेट फीस के साथ-साथ बकाया टैक्स पर ब्याज भी देना पड़ सकता है।
31 अगस्त क्यों है अहम?
आयकर विभाग आम तौर पर अलग-अलग श्रेणी के टैक्सपेयर्स के लिए ITR दाखिल करने की अलग-अलग डेडलाइन तय करता है। जिन टैक्सपेयर्स के लिए ऑडिट की जरूरत नहीं होती, उनके लिए लागू समयसीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करना जरूरी होता है।
AY 2026-27 के लिए 31 अगस्त 2026 की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए टैक्सपेयर्स को अंतिम दिनों में पोर्टल पर होने वाली तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए जल्द रिटर्न दाखिल कर देना चाहिए।
डेडलाइन निकल गई तो कितना जुर्माना?
अगर कोई व्यक्ति निर्धारित तारीख तक ITR दाखिल नहीं करता है और बाद में रिटर्न दाखिल करता है, तो उसे Section 234F के तहत लेट फीस देनी पड़ सकती है।
लेट फीस आम तौर पर:
कुल आय ₹5 लाख तक: अधिकतम ₹1,000
कुल आय ₹5 लाख से ज्यादा: अधिकतम ₹5,000
यानी अधिक आय वाले टैक्सपेयर के लिए देरी की स्थिति में ₹5,000 तक लेट फीस लग सकती है।
हालांकि, लेट फीस के अलावा यदि टैक्स की कोई रकम बकाया है तो उस पर लागू ब्याज भी देना पड़ सकता है।
सिर्फ लेट फीस ही नहीं, ब्याज का भी बोझ
अगर टैक्सपेयर के ऊपर टैक्स बकाया है और उसने समय पर भुगतान नहीं किया है, तो देरी की स्थिति में Section 234A समेत लागू प्रावधानों के तहत ब्याज लग सकता है।
इसलिए सिर्फ रिटर्न दाखिल करने की तारीख को ध्यान में रखना पर्याप्त नहीं है। टैक्सपेयर को यह भी देखना चाहिए कि उसकी कुल टैक्स देनदारी कितनी है और क्या कोई टैक्स पहले से जमा किया जा चुका है।
Belated ITR क्या होता है?
अगर कोई व्यक्ति तय समयसीमा तक अपना ITR दाखिल नहीं कर पाता, तो वह बाद में Belated Return दाखिल कर सकता है।
हालांकि Belated ITR में:
लागू लेट फीस देनी पड़ सकती है
बकाया टैक्स पर ब्याज लग सकता है
कुछ टैक्स लाभों पर असर पड़ सकता है
रिटर्न दाखिल करने की अंतिम वैधानिक समयसीमा का ध्यान रखना जरूरी होता है
इसलिए आखिरी तारीख निकलने का इंतजार करना टैक्सपेयर के लिए महंगा पड़ सकता है।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
नौकरीपेशा लोगों के साथ-साथ ऐसे लोगों को भी ITR की डेडलाइन पर नजर रखनी चाहिए जिनकी आय एक से अधिक स्रोतों से आती है।
उदाहरण के लिए:
Salary Income
Bank Interest
Rental Income
Capital Gains
Freelancing Income
Business Income
शेयर या म्यूचुअल फंड से होने वाली आय
ऐसे मामलों में Form 16, AIS और Form 26AS की जानकारी मिलाकर रिटर्न दाखिल करना बेहतर होता है।
ITR दाखिल करने से पहले ये चीजें जरूर चेक करें
ITR सबमिट करने से पहले टैक्सपेयर को अपनी जानकारी ध्यान से जांच लेनी चाहिए।
1. Form 16 चेक करें
नौकरीपेशा लोगों को अपनी salary और TDS की जानकारी Form 16 से मिलानी चाहिए।
2. AIS और Form 26AS देखें
इनमें दर्ज TDS, ब्याज, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन आदि की जानकारी को अपने रिकॉर्ड से मिलाएं।
3. बैंक अकाउंट की जानकारी सही दें
रिफंड की स्थिति में सही बैंक अकाउंट की जानकारी जरूरी है।
4. पुराने टैक्स रिकॉर्ड देखें
अगर पिछले वर्ष कोई टैक्स डिमांड या बकाया है, तो उसे भी जांचें।
5. ITR का सही फॉर्म चुनें
आय के स्रोत के आधार पर सही ITR फॉर्म चुनना बेहद जरूरी है।
आखिरी दिनों में पोर्टल पर बढ़ सकता है दबाव
ITR की अंतिम तारीख नजदीक आते ही बड़ी संख्या में लोग एक साथ रिटर्न दाखिल करते हैं। इससे कभी-कभी पोर्टल पर तकनीकी समस्या, OTP में देरी या वेरिफिकेशन से जुड़ी परेशानी हो सकती है।
इसलिए बेहतर है कि टैक्सपेयर अंतिम दिन का इंतजार न करे और अपने दस्तावेज तैयार करके पहले ही ITR दाखिल कर दे।
ITR दाखिल करने के बाद Verification भी जरूरी
रिटर्न दाखिल करने के बाद प्रक्रिया पूरी करने के लिए e-Verification बेहद जरूरी है। केवल ITR submit कर देना पर्याप्त नहीं माना जाता।
टैक्सपेयर Aadhaar OTP, EVC या उपलब्ध अन्य माध्यमों से अपना ITR verify कर सकता है।
अगर रिटर्न समय पर दाखिल कर दिया गया लेकिन निर्धारित तरीके से verify नहीं किया गया, तो रिटर्न की processing में समस्या हो सकती है।
निष्कर्ष
ITR दाखिल करने की समयसीमा नजदीक होने के कारण टैक्सपेयर्स के लिए अब सबसे जरूरी है कि वे आखिरी दिन का इंतजार न करें। समयसीमा के बाद Belated ITR दाखिल करने का विकल्प मौजूद है, लेकिन ₹5,000 तक लेट फीस और बकाया टैक्स पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
इसलिए Form 16, AIS और Form 26AS जैसी जानकारी को जांचकर जल्द से जल्द ITR दाखिल करना बेहतर विकल्प है।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
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