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पृथ्वी मिसाइल से बढ़ी भारत की ताकत, चीन-पाकिस्तान के लिए क्यों बनी चुनौती

पृथ्वी मिसाइल से बढ़ी भारत की ताकत, चीन-पाकिस्तान के लिए क्यों बनी चुनौती

पृथ्वी मिसाइल से चीन-पाकिस्तान को क्यों लगा बड़ा झटका? भारत के मिसाइल प्रोग्राम में ऐसे बढ़ी ताकत

भारत की मिसाइल ताकत की कहानी में पृथ्वी मिसाइल का नाम बेहद अहम माना जाता है। यह वही मिसाइल कार्यक्रम था जिसने भारत को स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक विकसित करने की दिशा में मजबूत आधार दिया। पृथ्वी का विकास इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) के तहत हुआ था और बाद में इसी तकनीकी अनुभव ने भारत के व्यापक मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में मदद की।

1980 के दशक में शुरू हुई थी बड़ी तैयारी

भारत ने 1983 में IGMDP की शुरुआत स्वदेशी मिसाइल विकास और उत्पादन की क्षमता हासिल करने के उद्देश्य से की थी। इस कार्यक्रम में पृथ्वी के साथ अग्नि, आकाश, त्रिशूल और नाग जैसे अलग-अलग मिसाइल प्रोजेक्ट शामिल थे।

पृथ्वी इस कार्यक्रम की शुरुआती बड़ी सफलताओं में रही और इसने भारत को कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक में स्वदेशी क्षमता विकसित करने का अनुभव दिया।

पृथ्वी ने भारत को क्या ताकत दी?

पृथ्वी एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल परिवार है। इसके अलग-अलग संस्करणों को भारतीय सशस्त्र सेनाओं की जरूरतों के अनुसार विकसित किया गया। CSIS के अनुसार, पृथ्वी-I की रेंज करीब 150 किलोमीटर थी और यह स्वदेशी भूमि तथा समुद्र आधारित मिसाइल प्रणालियों की एक महत्वपूर्ण शुरुआती कड़ी बनी।

बाद में पृथ्वी-II जैसे संस्करण विकसित हुए। जुलाई 2025 में भारत ने पृथ्वी-II का सफल परीक्षण भी किया था। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, पृथ्वी-II की रेंज करीब 350 किलोमीटर और पेलोड क्षमता 500 किलोग्राम तक बताई गई है।

पाकिस्तान के लिए क्यों अहम थी यह क्षमता?

पृथ्वी के आने से भारत की स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को वास्तविक सैन्य आधार मिला। इसके बाद क्षेत्र में मिसाइल क्षमताओं की प्रतिस्पर्धा भी तेज हुई। एक विश्लेषण के अनुसार, पृथ्वी के विकास ने भारत-पाकिस्तान के बीच मिसाइल प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया और पाकिस्तान ने भी अपनी मिसाइल क्षमताओं को आगे बढ़ाया।

हालांकि, इसे सीधे तौर पर यह कहना सही नहीं होगा कि पृथ्वी ने अकेले चीन या पाकिस्तान की सैन्य रणनीति को बदल दिया। भारत की मिसाइल ताकत आज पृथ्वी से आगे बढ़कर अग्नि श्रृंखला, क्रूज मिसाइलों और मिसाइल डिफेंस जैसी कई तकनीकों तक पहुंच चुकी है।

चीन के संदर्भ में क्या मायने रखती है पृथ्वी?

पृथ्वी की मुख्य भूमिका कम दूरी की है, इसलिए इसे चीन के खिलाफ भारत की लंबी दूरी की रणनीतिक क्षमता का मुख्य हथियार मानना सही नहीं होगा। चीन के संदर्भ में भारत की लंबी दूरी की क्षमता में अग्नि परिवार जैसी प्रणालियां अधिक महत्वपूर्ण हैं।

फिर भी पृथ्वी कार्यक्रम का महत्व इस बात में है कि इसने भारत को स्वदेशी मिसाइल डिजाइन, गाइडेंस, प्रणोदन और परीक्षण क्षमताओं को विकसित करने का महत्वपूर्ण अनुभव दिया। DRDO आज भी अग्नि और पृथ्वी श्रृंखला को देश की स्वदेशी रणनीतिक प्रणालियों की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल करता है।

पृथ्वी से शुरू हुआ सफर आज कहां पहुंचा?

पृथ्वी सिर्फ एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारत के स्वदेशी मिसाइल विकास की शुरुआती महत्वपूर्ण सीढ़ियों में से एक रही। इसके बाद भारत ने अलग-अलग दूरी और भूमिकाओं वाली मिसाइल प्रणालियां विकसित कीं।

यही वजह है कि भारत के मिसाइल कार्यक्रम के इतिहास में पृथ्वी को एक टर्निंग पॉइंट माना जाता है। इस कार्यक्रम से हासिल तकनीकी और औद्योगिक अनुभव ने देश की रक्षा आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।


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