France Protests: क्यों सड़कों पर उतरे हजारों स्कूली छात्र? 560 स्कूलों में प्रदर्शन, 1,900 से ज्यादा गिरफ्तार
- bySanjay
- 02 October, 2026
France Protests: क्यों सड़कों पर उतरे हजारों स्कूली छात्र? 560 स्कूलों में प्रदर्शन, 1,900 से ज्यादा गिरफ्तारियां और 305 पुलिसकर्मी घायल
पेरिस। फ्रांस में स्कूली छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया है। स्कूलों के बाहर बैरिकेडिंग, रास्ते रोकने और कई जगहों पर आगजनी तथा पुलिस के साथ झड़पों की घटनाओं ने सरकार के सामने कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। शुरुआत में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन कुछ ही दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों तक फैल गया। 2 अक्टूबर तक फ्रांस के 560 स्कूलों में प्रदर्शन या व्यवधान दर्ज किए गए, जबकि सैकड़ों स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हुई।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य शिकायतें स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बड़ी कक्षाएं, जर्जर या अपर्याप्त स्कूल सुविधाएं, लंबे स्कूल समय और शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधनों की मांग से जुड़ी हैं। कई छात्रों का कहना है कि उन्हें ऐसी परिस्थितियों में पढ़ाई करनी पड़ रही है जहां कभी शिक्षक उपलब्ध नहीं होते तो कभी कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या बहुत ज्यादा होती है। कुछ इलाकों में गर्मी के दौरान स्कूल भवनों की खराब स्थिति ने भी असंतोष को बढ़ाया।
लेकिन पिछले कुछ दिनों में प्रदर्शन का एक हिस्सा हिंसक घटनाओं में बदल गया। पुलिस और सरकार का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस पर वस्तुएं फेंकने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया। दूसरी ओर, छात्र संगठनों और कुछ राजनीतिक नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई तथा बल प्रयोग पर सवाल उठाए हैं। इस तरह फ्रांस में शिक्षा से शुरू हुआ विवाद अब कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक टकराव का मुद्दा भी बन गया है।
आखिर छात्र सड़कों पर क्यों उतरे?

फ्रांस में हाई स्कूल स्तर के विद्यार्थियों की शिकायतें मुख्य रूप से उनके रोजमर्रा के स्कूल अनुभव से जुड़ी हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और अनुपस्थित शिक्षकों की जगह समय पर दूसरे शिक्षक नहीं मिलते। इसके अलावा कई स्कूलों में कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने से पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायत भी सामने आई है।
कुछ छात्रों ने लंबे स्कूल शेड्यूल पर भी नाराजगी जताई है। रिपोर्टों के अनुसार, कई स्कूलों में पढ़ाई सुबह लगभग 8 बजे शुरू होती है और दिन काफी देर तक चलता है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने ऐसे पोस्टर भी दिखाए जिनमें लंबे स्कूल समय और पढ़ाई के दबाव को लेकर नाराजगी जाहिर की गई।
इसके अलावा स्कूल भवनों की स्थिति भी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। इस साल गर्मी के दौरान फ्रांस के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने के बाद छात्रों और शिक्षकों ने स्कूल भवनों में पर्याप्त वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पढ़ाई के लिए सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
प्रदर्शन कहां से शुरू हुआ?
यह आंदोलन सबसे पहले पेरिस क्षेत्र के हाई स्कूलों में दिखाई दिया और फिर धीरे-धीरे देश के अन्य शहरों तक फैल गया। शुरुआती दौर में स्कूलों के गेट ब्लॉक किए गए और छात्रों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। बाद में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन स्कूल परिसर से निकलकर सड़कों तक पहुंच गया।
रिपोर्टों के मुताबिक पेरिस के अलावा लियोन, लील, बोर्डो, रेनेस, नांत, मार्सेई और टूलूज सहित कई शहरों में भी प्रदर्शन और झड़पों की घटनाएं सामने आईं। कुछ जगहों पर छात्रों ने स्कूलों के प्रवेश मार्गों को बंद किया, जबकि कुछ इलाकों में पुलिस के साथ तनाव की स्थिति बनी।
560 स्कूलों में प्रदर्शन, लेकिन मंत्रालय के आंकड़े इससे भी बड़े
2 अक्टूबर को फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि 560 स्कूल प्रदर्शन या व्यवधान से प्रभावित हुए थे। इनमें से लगभग 400 स्कूलों में स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें बंद करना पड़ा।
हालांकि, 1 अक्टूबर के लिए गृह मंत्रालय के आंकड़े इससे भी ज्यादा व्यापक थे। मंत्रालय के अनुसार, देशभर के करीब 3,700 हाई स्कूलों में से 1,027 स्कूल किसी न किसी रूप में आंदोलन से प्रभावित हुए थे और 222 स्कूलों में नाकेबंदी दर्ज की गई। इसका मतलब है कि अलग-अलग सरकारी आंकड़े प्रदर्शन के अलग-अलग समय और मापदंड को दर्शा रहे हैं।
यही वजह है कि रिपोर्टों में कभी 560 स्कूलों का आंकड़ा और कभी 1,027 प्रभावित स्कूलों का आंकड़ा सामने आ रहा है। दोनों आंकड़ों को एक ही समयावधि का समान आंकड़ा मानना सही नहीं होगा।
1,900 से ज्यादा गिरफ्तारियां, पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना
प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद पुलिस कार्रवाई भी तेज हुई। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक 1 अक्टूबर को 1,949 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि उसी दिन 305 पुलिस अधिकारी घायल हुए।
इससे पहले आंदोलन के शुरुआती दिनों में गिरफ्तारियों की संख्या इससे काफी कम थी। Reuters की 30 सितंबर की रिपोर्ट में दो दिनों के दौरान 1,000 से अधिक गिरफ्तारियों और छात्रों तथा स्कूल कर्मचारियों समेत 119 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद 1 अक्टूबर को स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हुई।
यहां यह अंतर भी समझना जरूरी है कि 1,949 गिरफ्तारियां 1 अक्टूबर की गृह मंत्रालय की रिपोर्टेड संख्या है, जबकि आंदोलन शुरू होने के बाद कुल गिरफ्तारियों का आंकड़ा अलग हो सकता है। इसलिए इसे पूरे आंदोलन की अंतिम गिरफ्तारी संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
हिंसा और आगजनी से बढ़ा तनाव
प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर कूड़ेदानों और अन्य सामान में आग लगाने की घटनाएं सामने आईं। कुछ स्थानों पर पुलिस पर बोतलें और अन्य वस्तुएं फेंके जाने की रिपोर्ट भी आई। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज जैसे उपायों का इस्तेमाल किया।
फ्रांस के गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि कुछ घटनाओं में पुलिस और सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों में अंतर किया जाना चाहिए और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है।
दूसरी तरफ, कुछ छात्र संगठनों और राजनीतिक नेताओं का आरोप है कि पुलिस की प्रतिक्रिया कई जगह जरूरत से ज्यादा कठोर रही। कुछ घटनाओं में छात्रों के घायल होने के बाद पुलिस के बल प्रयोग को लेकर जांच और सवाल उठने लगे हैं।
स्कूलों में पढ़ाई पर पड़ा असर
प्रदर्शन के कारण बड़ी संख्या में स्कूलों में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कई जगह छात्रों ने स्कूल के मुख्य द्वार बंद कर दिए, जिसके चलते शिक्षक और अन्य कर्मचारी स्कूलों में प्रवेश नहीं कर सके। कुछ स्कूलों को सुरक्षा कारणों से बंद भी करना पड़ा।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार 2 अक्टूबर को 560 स्कूल प्रदर्शन या व्यवधान से प्रभावित थे और करीब 400 स्कूल बंद थे। ऐसे में छात्रों की नियमित पढ़ाई, परीक्षाओं की तैयारी और स्कूल प्रशासन का काम प्रभावित होना स्वाभाविक है।
सिर्फ छात्रों का मुद्दा नहीं, शिक्षक और सरकारी कर्मचारी भी नाराज
फ्रांस में छात्र आंदोलन ऐसे समय पर तेज हुआ है जब सरकारी बजट और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर भी विरोध चल रहा है। 29 सितंबर को देशव्यापी सार्वजनिक क्षेत्र की हड़ताल के दौरान शिक्षक, अग्निशमनकर्मी और दूसरे सरकारी कर्मचारी भी विरोध में शामिल हुए थे।
छात्र संगठनों और शिक्षक संगठनों की कुछ मांगें एक-दूसरे से जुड़ती हैं। दोनों पक्षों की शिकायतों में कर्मचारियों की कमी, संसाधनों की कमी और कामकाजी परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। यही वजह है कि छात्र आंदोलन को व्यापक सार्वजनिक क्षेत्र के असंतोष से अलग करके देखना मुश्किल हो रहा है।
फ्रांस सरकार ने क्या कहा?
फ्रांस सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को स्वीकार करते हुए हिंसा और तोड़फोड़ का विरोध किया है। सरकार का कहना है कि स्कूलों में छात्रों, शिक्षकों और पुलिस अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
प्रधानमंत्री Sébastien Lecornu और गृह मंत्री Laurent Nuñez ने प्रदर्शन के हिंसक हिस्से पर कड़ा रुख अपनाया है। सरकार के अनुसार स्कूलों के बाहर आगजनी, पुलिस पर हमले और तोड़फोड़ को सामान्य छात्र प्रदर्शन का हिस्सा नहीं माना जा सकता।
गृह मंत्रालय ने स्थिति बिगड़ने के बाद अतिरिक्त दंगा-रोधी पुलिस और मोबाइल जेंडार्म यूनिट तैनात करने का निर्णय भी लिया।
राजनीतिक विवाद भी बढ़ा
फ्रांस में छात्र आंदोलन अब राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। सरकार के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि कट्टर वामपंथी समूह आंदोलन को प्रभावित कर रहे हैं और हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं। दूसरी ओर, वामपंथी दलों के नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया है और छात्रों के शिक्षा संबंधी मुद्दों को गंभीरता से लेने की मांग की है।
इससे आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक तरफ सरकार कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रही है, जबकि दूसरी तरफ विपक्षी नेता छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों और पुलिस कार्रवाई पर जोर दे रहे हैं।
फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से चिंता
मौजूदा प्रदर्शन अचानक पैदा हुई समस्या नहीं हैं। फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों, शिक्षकों की उपलब्धता और अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक वर्गों के छात्रों के बीच प्रदर्शन के अंतर को लेकर पहले से चर्चा होती रही है।
हालिया PISA रिपोर्टों में भी फ्रांस के छात्रों के पढ़ने और गणित से जुड़े प्रदर्शन में गिरावट तथा सामाजिक रूप से अधिक और कम सुविधा वाले छात्रों के बीच अंतर जैसे मुद्दे सामने आए हैं। मौजूदा छात्र आंदोलन ने इन पुराने सवालों को फिर से सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
अब आगे क्या?
2 अक्टूबर को भी फ्रांस के कई हिस्सों में प्रदर्शन जारी रहे। स्कूलों के बाहर पुलिस की मौजूदगी बढ़ी हुई है और सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों का इस्तेमाल कर रही है।
आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या सरकार छात्रों और शिक्षकों की शिक्षा संबंधी शिकायतों पर बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ती है या प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बीच तनाव जारी रहता है।
फिलहाल इतना साफ है कि फ्रांस में शुरू हुआ यह आंदोलन केवल कुछ स्कूलों की स्थानीय समस्या तक सीमित नहीं रहा। शिक्षकों की कमी, बड़ी कक्षाएं, स्कूलों की स्थिति और लंबे पढ़ाई के समय से शुरू हुआ असंतोष अब देशव्यापी प्रदर्शन, स्कूल बंद होने, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और पुलिस के साथ टकराव तक पहुंच चुका है।
महत्वपूर्ण आंकड़े
- 560 स्कूल: 2 अक्टूबर तक प्रदर्शन या व्यवधान से प्रभावित होने की शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट।
- लगभग 400 स्कूल: 2 अक्टूबर को बंद बताए गए।
- 1,027 स्कूल: 1 अक्टूबर को गृह मंत्रालय के अनुसार आंदोलन से प्रभावित।
- 222 स्कूल: 1 अक्टूबर को नाकेबंदी की रिपोर्ट।
- 1,949 गिरफ्तारियां: 1 अक्टूबर को पुलिस/जेंडार्म द्वारा की गई गिरफ्तारियां।
- 305 पुलिसकर्मी घायल: 1 अक्टूबर की गृह मंत्रालय की रिपोर्ट।
- 65 शिक्षा कर्मचारी और 170 छात्र घायल: शिक्षा मंत्री के अनुसार आंदोलन शुरू होने के बाद की रिपोर्टेड संख्या।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
"Peter Dutton Affirm...
Related Post
Recent News
Daily Newsletter
Get all the top stories from Blogs to keep track.









