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Exclusive | मेरे लिए लोहड़ी है सर्दियों के बाद आने वाली गर्माहट, आभार और साथ आने की खुशी: राशि खन्ना

Exclusive | मेरे लिए लोहड़ी है सर्दियों के बाद आने वाली गर्माहट, आभार और साथ आने की खुशी: राशि खन्ना

सर्द हवा जब आख़िरी बार अपनी ताक़त दिखा चुकी होती है, अलाव जल उठते हैं, मूंगफली की खुशबू हवा में घुल जाती है और ढोल की थाप दिल तक पहुँचती है—बस वहीं से लोहड़ी शुरू होती है। यह सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, यह एहसास है। और यही बात अभिनेत्री राशि खन्ना ने बेहद सादगी और सच्चाई से कही।

एक एक्सक्लूसिव बातचीत में राशि खन्ना ने बताया कि लोहड़ी उनके लिए किसी धार्मिक रस्म से कहीं आगे की चीज़ है।

“लोहड़ी मेरे लिए गर्माहट है—सिर्फ़ आग की नहीं, रिश्तों की। यह आभार का त्योहार है, यह याद दिलाता है कि ठंड चाहे कितनी भी लंबी हो, उसके बाद लोग फिर साथ आते हैं।”

🌾 लोहड़ी: एक त्योहार जो मिट्टी से जुड़ा है

राशि मानती हैं कि आज की भागती-दौड़ती ज़िंदगी में ऐसे त्योहार और भी ज़रूरी हो जाते हैं। लोहड़ी हमें खेती, प्रकृति और मौसम के चक्र से जोड़ती है। यह वही भारत है जो सदियों से धरती के साथ सांस लेता आया है।

उनके शब्दों में,

“हम जितने मॉडर्न हो जाएँ, पर त्योहार हमें हमारी जड़ों की तरफ़ खींच ही लाते हैं। लोहड़ी उसी मिट्टी की खुशबू है।”

🔥 अलाव के चारों ओर लोग, कहानियाँ और हँसी

राशि बताती हैं कि उन्हें लोहड़ी की सबसे खूबसूरत चीज़ लगती है—लोगों का एक साथ आना। न फोन, न स्क्रिप्ट, न कैमरा। सिर्फ़ लोग, बातें और हँसी।

“आजकल हम ‘connected’ तो हैं, लेकिन साथ कम होते हैं। लोहड़ी वो मौका है जब लोग सच में पास आते हैं।”

🧣 सर्दियों को विदाई, उम्मीदों को न्योता

लोहड़ी सिर्फ़ सर्दी का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का संकेत है। राशि इसे एक भावनात्मक ट्रांज़िशन मानती हैं—जहाँ ठंड की चुप्पी के बाद ज़िंदगी फिर मुस्कुराने लगती है।

उनका कहना है कि यह त्योहार सिखाता है कि हर मुश्किल मौसम के बाद गर्माहट ज़रूर आती है। यह सोच आज के युवाओं के लिए बेहद ज़रूरी है।

🎭 परंपरा और आज का दौर—दोनों का संतुलन

राशि खन्ना उन कलाकारों में हैं जो परंपरा को बोझ नहीं, ताक़त मानती हैं। उनका साफ़ कहना है कि त्योहारों को “ट्रेंड” बनने की ज़रूरत नहीं—वे पहले से ही timeless हैं।

“कुछ चीज़ें बदलने के लिए नहीं बनी होतीं। उन्हें वैसे ही जीना चाहिए, जैसे सदियों से जिया गया है।”

🌟 सेलिब्रिटी होते हुए भी ज़मीन से जुड़ी सोच

फिल्मों और ग्लैमर की दुनिया में रहते हुए भी राशि का त्योहारों को देखने का नज़रिया बेहद घरेलू और सच्चा है। न दिखावा, न शोर—बस अपनापन।

🪔 लोहड़ी और आज की पीढ़ी

राशि मानती हैं कि Gen Z को ऐसे त्योहारों को ‘रील’ से बाहर निकालकर असल ज़िंदगी में जीना चाहिए।

“त्योहार पोस्ट करने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए होते हैं।”
और सच कहें तो—वो बिल्कुल सही कह रही हैं।

🌸 निष्कर्ष

लोहड़ी, राशि खन्ना के लिए, सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं। यह एक एहसास है—

गर्माहट का

आभार का

और लोगों के साथ आने का

एक ऐसा त्योहार जो बताता है कि चाहे ज़िंदगी कितनी भी ठंडी क्यों न हो जाए, इंसानियत की आग अगर जली रहे—तो सब ठीक हो जाता है।


Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.

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