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दौसा में पांच धर्मकांटों पर विभाग की कार्रवाई, बिना सत्यापन चल रहे तौल उपकरणों पर ₹70 हजार का जुर्माना

दौसा में पांच धर्मकांटों पर विभाग की कार्रवाई, बिना सत्यापन चल रहे तौल उपकरणों पर ₹70 हजार का जुर्माना

दौसा में पांच धर्मकांटों पर विभाग की कार्रवाई, बिना सत्यापन चल रहे तौल उपकरणों पर ₹70 हजार का जुर्माना

दौसा। जिले के सिकराय और मंडावर क्षेत्र में माल ढुलाई करने वाले वाहनों का वजन करने वाले पांच धर्मकांटों पर विधिक माप विज्ञान विभाग ने कार्रवाई की है। 21 और 22 अक्टूबर 2026 को किए गए औचक निरीक्षण के दौरान इन धर्मकांटों पर वजन मापने वाले उपकरणों का निर्धारित अवधि में आधिकारिक सत्यापन नहीं पाया गया। विभागीय कार्रवाई के तहत संबंधित संचालकों पर कुल 70 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

यह कार्रवाई व्यापारिक लेन-देन में सही वजन सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं तथा कारोबारियों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से की गई। धर्मकांटों पर ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य मालवाहक वाहनों में लदे सामान का वजन किया जाता है। ऐसे में वजन मापने वाले उपकरणों का नियमानुसार सत्यापित होना महत्वपूर्ण माना जाता है।

सिकराय और मंडावर में किन धर्मकांटों की हुई जांच?

विभागीय जानकारी के अनुसार, निरीक्षण अभियान में सिकराय क्षेत्र के दो और मंडावर क्षेत्र के तीन धर्मकांटे शामिल थे।

सिकराय क्षेत्र में जांच के दायरे में आए धर्मकांटे:

श्री बालाजी धर्मकांटा

मारुति धर्मकांटा

मंडावर क्षेत्र में जांच के दायरे में आए धर्मकांटे:

लक्ष्मी धर्मकांटा

बालाजी धर्मकांटा

सैनी धर्मकांटा

जांच के दौरान इन पांचों स्थानों पर मालवाहक वाहनों का वजन करने वाले उपकरण निर्धारित समयावधि में विभागीय सत्यापन और प्रमाणन के बिना संचालित पाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, नियमों के उल्लंघन पर कुल 70 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

धर्मकांटों के उपकरणों का सत्यापन क्यों जरूरी है?

धर्मकांटे पर वाहन का वजन केवल एक सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि माल की खरीद-बिक्री, परिवहन और भुगतान से भी जुड़ा होता है। वजन के आधार पर माल की मात्रा तय होने से व्यापारियों, वाहन संचालकों और माल खरीदने वालों के बीच लेन-देन प्रभावित हो सकता है।

यदि वजन मापने वाला उपकरण निर्धारित मानकों के अनुरूप सत्यापित नहीं है, तो उसके माप की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। इसलिए उपकरणों का समय पर सत्यापन और प्रमाणन आवश्यक है।

विधिक माप विज्ञान विभाग का काम व्यापार में इस्तेमाल होने वाले बाट, तराजू और अन्य माप उपकरणों की शुद्धता सुनिश्चित करना है। राजस्थान सरकार के विभागीय विवरण के अनुसार, निर्धारित अवधि पर उपकरणों का सत्यापन और उन पर प्रमाणन चिह्न लगाना विभाग की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।

आम लोगों और व्यापारियों पर क्या पड़ सकता है असर?

धर्मकांटों पर सही वजन दर्ज होना कई तरह के व्यापारिक लेन-देन में महत्वपूर्ण है। खासकर निर्माण सामग्री, कृषि उपज, थोक माल और अन्य भारी सामान की ढुलाई में वाहन के वजन का उपयोग किया जाता है।

सत्यापन की व्यवस्था से जुड़े कुछ प्रमुख पहलू हैं:

सही वजन का भरोसा: निर्धारित मानकों के अनुसार उपकरणों की जांच से माप की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलती है।

व्यापार में पारदर्शिता: माल के वजन को लेकर विवाद होने की आशंका कम करने में मानक उपकरण उपयोगी होते हैं।

उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा: वजन और मात्रा के आधार पर होने वाले लेन-देन में सही माप जरूरी है।

नियमों का पालन: धर्मकांटा संचालकों को लागू नियमों के अनुसार उपकरणों का सत्यापन कराना चाहिए।

हालांकि, इस कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट में किसी ग्राहक को कम वजन दिए जाने या किसी विशेष व्यापारिक लेन-देन में धोखाधड़ी साबित होने की जानकारी नहीं दी गई है। कार्रवाई का घोषित आधार तौल उपकरणों का निर्धारित सत्यापन नहीं मिलना है।

त्योहारों के दौरान बाजारों पर भी रहेगी विभाग की नजर

रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने आगामी त्योहारों को देखते हुए बाजारों में जांच बढ़ाने की बात कही है। इसके तहत मिठाई की दुकानों, किराना प्रतिष्ठानों और पैकेज्ड वस्तुओं की बिक्री करने वाले कारोबारियों के यहां जांच की जा सकती है।

ऐसी जांच में पैकेट पर दर्ज वजन, अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी, निर्माण तिथि और अन्य अनिवार्य घोषणाओं की पड़ताल की जाती है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

पैकेज्ड वस्तुओं पर दर्ज जानकारी ग्राहकों को उत्पाद की मात्रा और कीमत समझने में मदद करती है। इसलिए दुकानदारों और निर्माताओं के लिए लागू पैकेजिंग तथा माप-तौल नियमों का पालन करना जरूरी है।

नियमों की अनदेखी पर आगे भी हो सकती है कार्रवाई

विधिक माप विज्ञान विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य व्यापार में इस्तेमाल होने वाले माप उपकरणों की शुद्धता बनाए रखना है। निर्धारित समय पर सत्यापन नहीं कराने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध लागू कानून और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

सिकराय और मंडावर में पांच धर्मकांटों की जांच तथा 70 हजार रुपये के कुल जुर्माने की यह कार्रवाई स्थानीय व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए भी नियमों के पालन का संदेश देती है। धर्मकांटा संचालकों के लिए समय पर उपकरणों का सत्यापन कराना जरूरी है, ताकि माल के वजन से जुड़े लेन-देन में पारदर्शिता बनी रहे।

खबर का सार: 21 और 22 अक्टूबर 2026 को सिकराय और मंडावर क्षेत्र में पांच धर्मकांटों की जांच की गई। निर्धारित अवधि में तौल उपकरणों का आधिकारिक सत्यापन नहीं मिलने पर संबंधित संचालकों पर कुल 70 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। विभाग ने त्योहारों के दौरान पैकेज्ड वस्तुओं और बाजारों में माप-तौल संबंधी नियमों की जांच पर भी जोर दिया है।


Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.

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