अमेरिकी संसद पर डिजिटल हमला: चीन ने यूएस कांग्रेस की ईमेल प्रणाली को किया हैक, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
- byAman Prajapat
- 08 January, 2026
डिजिटल युग की लड़ाइयाँ अब बंदूकों से नहीं, कीबोर्ड और कोड से लड़ी जा रही हैं। सीमाएँ अब नक्शों पर नहीं, बल्कि सर्वरों और ईमेल इनबॉक्स में तय होती हैं। ताज़ा रिपोर्ट ने इसी अदृश्य युद्ध का पर्दाफाश किया है—जहाँ आरोप है कि चीन से जुड़े हैकर्स ने अमेरिकी कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण समिति के स्टाफ की ईमेल प्रणालियों में सेंध लगाई।
ये कोई मामूली आईटी गड़बड़ी नहीं थी। ये सीधा हमला था उस लोकतांत्रिक ढांचे पर, जिसे अमेरिका अपनी रीढ़ मानता है।
🔍 क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर हमले का निशाना अमेरिकी कांग्रेस की वह समिति बनी जो राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मामलों पर काम करती है। हैकर्स ने स्टाफ मेंबर्स की ईमेल आईडी तक पहुंच बना ली, जिससे संवेदनशील संवाद, रणनीतिक दस्तावेज़ और आंतरिक चर्चाएँ जोखिम में आ गईं।
सीधी भाषा में कहें तो—राजनीति की रसोई में कोई चोरी-छिपे झांक रहा था।
🧠 चीन पर शक क्यों?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हमले का तरीका, इस्तेमाल किया गया मालवेयर और सर्वर रूटिंग ऐसे संकेत देते हैं जो पहले भी चीन से जुड़े साइबर अभियानों में देखे जा चुके हैं।
हालांकि चीन ने हमेशा की तरह इन आरोपों को “बेबुनियाद” बताया है, लेकिन इतिहास गवाह है—जहाँ धुआँ होता है, वहाँ आग भी होती है।
🌍 साइबर जासूसी: नया कोल्ड वॉर
एक ज़माना था जब अमेरिका और सोवियत यूनियन आमने-सामने खड़े होते थे। आज वही ठंडा युद्ध यूएस बनाम चीन के रूप में डिजिटल दुनिया में चल रहा है।
डेटा ही नया तेल है, और जो डेटा कंट्रोल करता है—वही ताकतवर है।
चीन पहले भी सरकारी संस्थानों, टेक कंपनियों और रिसर्च लैब्स पर साइबर जासूसी के आरोप झेल चुका है। यह हमला उसी सिलसिले की एक और कड़ी माना जा रहा है।
⚠️ अमेरिका के लिए खतरा कितना बड़ा?
यह हमला सिर्फ ईमेल तक सीमित नहीं है। यह सवाल उठाता है:
क्या अमेरिका की साइबर सुरक्षा वाकई मजबूत है?
क्या लोकतांत्रिक संस्थान डिजिटल हमलों से सुरक्षित हैं?
और सबसे अहम—क्या भविष्य के चुनाव और नीतियाँ भी निशाने पर हो सकती हैं?
सीधी बात—अगर कांग्रेस सुरक्षित नहीं, तो आम सिस्टम क्या ही होंगे।
🛡️ अमेरिकी प्रशासन की प्रतिक्रिया
अमेरिकी अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है और साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त करने की बात कही है। कुछ ईमेल अकाउंट्स को अस्थायी रूप से बंद किया गया, पासवर्ड बदले गए और फॉरेंसिक जांच चल रही है।
लेकिन सच कड़वा है—डैमेज हो चुका है।
🌐 वैश्विक असर
इस खुलासे के बाद अमेरिका-चीन रिश्तों में और तल्खी आना तय है। पहले ही व्यापार, ताइवान और तकनीक को लेकर तनाव चरम पर है। अब साइबर हमला उस आग में घी डालने जैसा है।
दुनिया दो खेमों में बंटती दिख रही है:
एक तरफ डेटा की आज़ादी और पारदर्शिता
दूसरी तरफ नियंत्रण और निगरानी

📢 डिजिटल दुनिया की सच्चाई
आज की पीढ़ी ऑनलाइन जीती है—मेल, क्लाउड, चैट, सब कुछ। लेकिन यह खबर एक चेतावनी है:
इंटरनेट जितना ताकतवर है, उतना ही खतरनाक भी।
पुराने ज़माने में जासूस डायरी चुराते थे, आज पासवर्ड।
✍️ निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ अमेरिका या चीन का नहीं है। यह पूरी दुनिया के लिए एक अलार्म है कि साइबर सुरक्षा अब विकल्प नहीं, मजबूरी है।
जो देश आज इसे हल्के में लेगा, कल उसकी गोपनीयता नीलाम होगी।
और सच कहें तो—
डिजिटल युद्ध शुरू हो चुका है, और इसमें जीत उसी की होगी जो डेटा को समझता है, बचाता है और संभालता है।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
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