केंद्र का ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव, ₹1.86 लाख करोड़ की योजना को मंजूरी; 135 GW हरित बिजली के लिए बनेगा ट्रांसमिशन नेटवर्क
- bySanjay
- 30 September, 2026
केंद्र का ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव, ₹1.86 लाख करोड़ की योजना को मंजूरी; 135 GW हरित बिजली के लिए बनेगा ट्रांसमिशन नेटवर्क
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नई दिल्ली। भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और अक्षय ऊर्जा से बनने वाली बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने Green Energy Corridor Phase-III (GEC-III) योजना को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर 2026 को इस योजना को मंजूरी दी। इसका कुल प्रोजेक्ट आउटले ₹1,86,405 करोड़ है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्यों के भीतर बिजली के ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना है, ताकि अलग-अलग राज्यों में बनने वाली बड़ी मात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा को प्रभावी ढंग से ग्रिड तक पहुंचाया जा सके। सरकार के मुताबिक GEC-III के तहत 135 गीगावॉट तक नवीकरणीय ऊर्जा के पावर इवैक्यूएशन को सक्षम बनाया जाएगा।
₹1.36 लाख करोड़ ट्रांसमिशन सिस्टम पर
कुल राशि में से करीब ₹1,36,378 करोड़ राज्यों के भीतर ट्रांसमिशन सिस्टम विकसित करने के लिए रखे गए हैं। इसका मकसद ऐसे क्षेत्रों से बिजली निकालने की क्षमता बढ़ाना है, जहां सौर और पवन ऊर्जा की परियोजनाएं तेजी से विकसित हो रही हैं।
अक्षय ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के साथ सिर्फ बिजली पैदा करना पर्याप्त नहीं है। सौर और पवन ऊर्जा की उपलब्धता मौसम और समय के अनुसार बदलती रहती है। इसलिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और ऊर्जा भंडारण को समानांतर रूप से विकसित करना जरूरी है।
बैटरी स्टोरेज के लिए ₹50 हजार करोड़
योजना में 50 GWh Battery Energy Storage Systems (BESS) लगाने का भी प्रावधान है। इसके लिए ₹50,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार बैटरी स्टोरेज से ग्रिड में अक्षय ऊर्जा के उतार-चढ़ाव को संभालने, बिजली की भीड़ यानी congestion कम करने और गैर-सौर घंटों में बिजली की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य
भारत ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। जुलाई 2026 के अंत तक देश की गैर-जीवाश्म आधारित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 300.50 GW तक पहुंच चुकी थी। इसमें सौर, पवन, जलविद्युत, बायो-पावर और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उसे देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क और स्टोरेज क्षमता का विस्तार भी जरूरी है।
योजना कब तक पूरी होगी?
सरकार के अनुसार GEC-III को वित्त वर्ष 2032-33 तक स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके जरिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अक्षय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने की क्षमता बढ़ाने की योजना है।
कुल मिलाकर, नई योजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा विस्तार के साथ-साथ बिजली ग्रिड के आधुनिकीकरण पर केंद्रित है। इसका असर आने वाले वर्षों में सौर और पवन ऊर्जा से बनने वाली बिजली को अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की क्षमता पर पड़ सकता है।
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