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बाजार में हाहाकार पर मुख्य आर्थिक सलाहकार का बड़ा बयान, बताया कब तक रहेगा दबाव

बाजार में हाहाकार पर मुख्य आर्थिक सलाहकार का बड़ा बयान, बताया कब तक रहेगा दबाव

बाजार में मचे हाहाकार पर मुख्य आर्थिक सलाहकार का बड़ा बयान, बताया- कब तक रह सकता है दबाव

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंथा नागेश्वरन ने मौजूदा हालात को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 30 सितंबर को भी सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में बंद हुए, जबकि व्यापक बाजार के कुछ हिस्सों में मजबूती देखने को मिली।

नागेश्वरन ने 25 सितंबर को कहा था कि भारत के सामने निकट अवधि में अमेरिका के साथ संबंध, ऊर्जा बाजार और AI से जुड़ी चुनौतियां प्रमुख आर्थिक जोखिम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से उभरते बाजारों की ओर विदेशी पूंजी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और कुछ समय तक पूंजी जुटाने पर दबाव बना रह सकता है।

उनके मुताबिक मौजूदा परिस्थितियां केवल घरेलू बाजार से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और निवेश के माहौल में हो रहे बदलावों से भी प्रभावित हैं। उन्होंने भारत को रणनीतिक बफर तैयार करने और महत्वपूर्ण वस्तुओं की आपूर्ति को अधिक सुरक्षित बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।

बाजार में अभी क्यों है दबाव?

30 सितंबर के कारोबार में सेंसेक्स करीब 49 अंक गिरकर 72,480 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 लगभग 96 अंक टूटकर 22,620 पर आ गया। हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में करीब 0.3% तक की बढ़त रही।

बाजार पर खास तौर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों का असर दिखाई दे रहा है। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के कारण निवेशक जोखिम लेने में सावधानी बरत रहे हैं।

कब तक रहेंगे ऐसे हालात?

नागेश्वरन के बयानों से यह संकेत मिलता है कि दबाव तुरंत खत्म होने की गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में पूंजी जुटाने पर कुछ समय तक दबाव रह सकता है। हालांकि, यह किसी निश्चित तारीख या अवधि की भविष्यवाणी नहीं है।

इसी बीच बाजार से जुड़े अन्य अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भी मौजूदा अस्थिरता को वैश्विक परिस्थितियों से जोड़कर देखा है। SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 30 सितंबर को कहा कि वैश्विक परिस्थितियां असाधारण हैं, लेकिन भारतीय बाजारों की बुनियादी स्थिति को लेकर उन्होंने लचीलापन होने की बात कही।

निष्कर्ष: मौजूदा बाजार दबाव के पीछे एक ही कारण नहीं है। वैश्विक बॉन्ड यील्ड, ऊर्जा कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी पूंजी के रुख जैसे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं। इसलिए आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन किसी निश्चित तारीख तक यह स्थिति खत्म होगी—ऐसा CEA ने नहीं कहा है।


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