बेंगलुरु में महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी धोखाधड़ी का केस दर्ज
- byAman Prajapat
- 22 November, 2025
यह कहानी लोकतंत्र की नाजुक धुरी पर टिकी है — बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर फर्जी मतदाताओं को शामिल करने का आरोप सामने आया है। यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं है, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक गंभीर चुनौती है।
शिकायत और एफआईआर की बात
39 वर्षीय य विनोदा, जो बेंगलुरु के नल्लुरहल्ली की निवासी हैं, उन्होंने एक शिकायत दर्ज कराई है।
उन्होंने दावा किया है कि अज्ञात सरकारी अधिकारियों, राजनीतिक पार्टी के सदस्यों और निजी व्यक्तियों ने सांठ-गांठ करके महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र की वोटर सूची में नकली नाम जोड़ दिए।
उनकी शिकायत में कहा गया है कि यह एक सुनियोजित साजिश है, न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि उच्च स्तरीय लोगों की मिलीभगत के साथ।
पुलिस ने उनकी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है, और प्रारंभिक जांच शुरू की है।
एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (IPC) की कुछ धाराओं के अलावा Representation of the People Act, 1951 की धारा 129 के तहत कार्रवाई की गई है।
राहुल गांधी का आरोप और कांग्रेस की भूमिका
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहले ही महादेवपुरा में कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाया था, और दावा किया था कि लगभग 1,00,250 वोट “चोरी” गए हैं।
उनके मुताबिक, यह धोखाधड़ी कई तरीकों से की गई है: डुप्लिकेट वोटर एंट्री, फर्जी या अवैध पते, एक ही पते पर बहुत सारे वोटर, अवैध / अनचाही फोटो, और Form 6 का दुरुपयोग।
राहुल गांधी ने कर्नाटक सरकार और चुनाव आयोग से पूरी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
महादेवपुरा विधानसभा विधानसभा क्षेत्र, इस पूरे विवाद में इसलिए और अहम है क्योंकि यह बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
स्थानीय और तकनीकी पड़ताल
India Today की फील्ड रिपोर्ट में एक दिलचस्प बिंदु सामने आया: बूथ नंबर 470 में मुनी रेड्डी गार्डन के एक बेहद छोटे मकान (लगभग कुछ ही स्क्वायर फीट का) में लगभग 80 मतदाता दर्ज हैं।
उस मकान के वर्तमान निवासी ने बताया कि वह खुद हाल ही में वहां आए हैं, और उन 80 नामों में से अधिकांश से उनका कोई परिचय नहीं है।
मकान मालिक ने स्वीकार किया है कि कई किरायेदार रहे हैं, और उनमें से कुछ ही मतदान के समय वापस आते हैं, लेकिन कई नाम अब उस पते पर रहने वाले व्यक्तियों से मेल नहीं खाते।
कांग्रेस की अंदरूनी जाँच टीम ने पिछले छह महीनों में मिले-जुले डेटा का विश्लेषण किया है, और उन्होंने यह कहा है कि बिना मशीन-रीडिबल वोटर रोल्स के काम करना बेहद मुश्किल था।

अनोखे आरोप और विवरण
कांग्रेस के एक नेता मंसूर खान ने यह दावा किया कि पिछले 10 महीनों में महादेवपुरा में 52,000 नए वोटर जोड़ दिए गए हैं।
उनका कहना है कि इनमें से बहुत से वोटर ऐसे पते पर हैं जहां रहना असंभव लगता है — एक कमरे में दहाई लोगों का पंजीकरण, धुंधली फोटो वाले वोटर आईडी, “पता 0000” जैसे पते, और यहाँ तक कि 68 वोटर एक शराब की भट्टी (brewery) में नामांकित हैं।
यह आरोप यह दर्शाता है कि यह सिर्फ अनदेखी या प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि उत्सुकता से विनिर्मित व्यवस्था की संभावना हो सकती है।
लोकतांत्रिक महत्व और निहितार्थ
यह मामला सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र की बात नहीं है — यह हमारे निर्वाचन प्रणाली की स्वच्छता, चुनावी अधिकारियों की भूमिका, और लोकतांत्रिक विश्वास के सवाल को उठाता है।
अगर शिकायतकर्ता की बात सही है, तो यह मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर जालसाजी को दर्शाता है, जो सार्वजनिक जनादेश को विकृत कर सकता है।
य विनोदा ने एक निष्पक्ष, पारदर्शी और गहरी जांच की मांग की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
राहुल गांधी और कांग्रेस की मांग यह है कि चुनाव आयोग मशीन-रीडिबल वोटर रोल्स जारी करे, ताकि स्वतंत्र और तकनीकी रूप से सक्षम पक्षों द्वारा विश्लेषण किया जा सके।
यदि यह मामला गंभीरता से न सुलझाया गया, तो यह भविष्य के चुनावों में मतदाता विश्वास को हानि पहुंचा सकता है।
अभी आगे क्या हो सकता है
पुलिस जांच: पुलिस पहले ही जांच शुरू कर चुकी है, लेकिन अब इसे तेजी से, निष्पक्ष रूप से और पारदर्शी तरीके से आगे ले जाना चाहिए।
निर्वाचन आयोग की भूमिका: EC को चाहिए कि वह आरोपों की पूरी गंभीरता से जाँच करें, और अगर फर्जी पंजीकरण हुआ है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
स्वतंत्र विश्लेषण: कांग्रेस और अन्य नागरिक समूह मिलकर तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से वोटर लिस्ट का विश्लेषण कर सकते हैं, बशर्ते कि मशीन-रीडिबल डेटा उपलब्ध हो।
नागरिक जागरूकता: स्थानीय लोग, मीडिया और नागरिक समाज को इस मुद्दे को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह सिर्फ एक निर्वाचन क्षेत्र का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रश्न है।
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