मां बनने के 3 हफ्ते बाद काम पर लौटीं भारती सिंह, पैपराज़ी को मिठाई बांटते हुए बोलीं—“सोचा था किशमिश आएगी…”
- byAman Prajapat
- 07 January, 2026
मुंबई की सड़कों पर जब कैमरे चमकते हैं, तो अक्सर कोई न कोई कहानी बन ही जाती है। इस बार कहानी सिर्फ एक सेलिब्रिटी की नहीं, बल्कि एक मां के जज़्बे, मेहनत और ह्यूमर की है।
कॉमेडी क्वीन भारती सिंह—जो अपने ठहाकों से लाखों दिल जीतती आई हैं—अब एक नई भूमिका में भी उतनी ही दमदार नज़र आ रही हैं: मां।
👶 बेटे ‘काजू’ के जन्म के बाद पहला पब्लिक अपीयरेंस
मां बनने के महज़ तीन हफ्ते बाद भारती सिंह जब काम पर लौटीं, तो यह सिर्फ एक न्यूज़ नहीं थी—यह एक स्टेटमेंट था।
कैमरों के सामने आते ही उन्होंने पैपराज़ी को मिठाई बांटी और अपने चिर-परिचित अंदाज़ में कहा,
“सोचा था किशमिश आएगी… लेकिन काजू आ गया!”
बस फिर क्या—हंसी, तालियाँ और सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप।
🎭 ह्यूमर वही, जिम्मेदारी दोगुनी
भारती सिंह हमेशा से कहती आई हैं कि कॉमेडी उनके लिए सिर्फ काम नहीं, इबादत है।
मां बनने के बाद भी उनका ये जज़्बा ज़रा भी कम नहीं हुआ।
आज जब ज़्यादातर लोग लंबा ब्रेक लेने की बात करते हैं, भारती ने दिखा दिया कि
औरत अगर ठान ले, तो मां बनकर भी मंच संभाल सकती है।
यह वही पुरानी भारतीय सोच है—काम और परिवार में बैलेंस—बस नए ज़माने की हिम्मत के साथ।
📸 पैपराज़ी संग दिल से रिश्ता
जहाँ कई सेलेब्स कैमरों से दूरी बना लेते हैं, वहीं भारती का रिश्ता पैपराज़ी से हमेशा दिल का रहा है।
मिठाई बांटना सिर्फ एक रस्म नहीं थी—वो एक थैंक यू था।
उन लोगों के लिए जो हर उतार-चढ़ाव में मौजूद रहते हैं।
🤍 हार्ष लिम्बाचिया का सपोर्ट
इस पूरे सफ़र में पति हार्ष लिम्बाचिया एक मजबूत स्तंभ बनकर खड़े रहे।
काम हो या बच्चा—दोनों को लेकर दोनों की साझेदारी साफ झलकती है।
ये वही पुरानी कहावत है—
“घर तब चलता है जब दोनों पहिए साथ घूमें।”
🌍 सोशल मीडिया पर रिएक्शन
जैसे ही वीडियो सामने आया, सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई—
“रियल क्वीन 👑”
“वर्किंग मदर्स के लिए इंस्पिरेशन”
“ह्यूमर कभी मत छोड़ना भारती”
लोगों को ये पसंद आया कि सफलता के शोर में भी उन्होंने ज़मीन से जुड़ा अंदाज़ नहीं छोड़ा।
🧠 काम पर जल्दी लौटना—चॉइस या मजबूरी?
इस खबर ने एक जरूरी बहस भी छेड़ दी।
क्या मां बनने के बाद जल्दी काम पर लौटना दबाव है या खुद का फैसला?
भारती के केस में जवाब साफ है—
👉 यह उनकी चॉइस है।
ना कोई दिखावा, ना कोई मजबूरी—बस अपने काम से प्यार।

✨ पुरानी सोच, नई ताकत
हमारे समाज में हमेशा से मेहनती औरतों की कद्र रही है।
भारती सिंह उसी परंपरा की आधुनिक मिसाल हैं—
जहाँ संस्कार भी हैं, और आत्मनिर्भरता भी।
🔚 निष्कर्ष
भारती सिंह का काम पर लौटना सिर्फ एक एंटरटेनमेंट न्यूज़ नहीं,
बल्कि यह कहानी है हौसले, ममता और मुस्कान की।
आज वो सिर्फ कॉमेडियन नहीं—
वो हर उस औरत की आवाज़ हैं जो कहती है:
“मैं मां भी हूँ, और मैं अपने सपनों से समझौता नहीं करूंगी।”
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