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बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण आंदोलन तेज: तीसरे दिन भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी

बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण आंदोलन तेज: तीसरे दिन भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी

राजस्थान के बीकानेर में राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर शुरू किया गया आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों और संतों द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी है। कड़ाके की ठंड के बावजूद प्रदर्शनकारी अपने संकल्प पर अडिग हैं और मांगें पूरी होने तक आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, बीकानेर के एक सार्वजनिक पार्क में 450 से अधिक प्रदर्शनकारी, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, दिन-रात धरने पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी वृक्ष न केवल राजस्थान की पहचान है, बल्कि यह पर्यावरण संतुलन, जल संरक्षण और स्थानीय जैव विविधता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

खेजड़ी को राजस्थान का राज्य वृक्ष घोषित किया गया है और इसका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा पर्यावरणीय महत्व रहा है। यह वृक्ष रेगिस्तानी इलाकों में जीवन का आधार माना जाता है, क्योंकि यह मिट्टी को उपजाऊ बनाता है और पशुओं के लिए चारा भी उपलब्ध कराता है। इसके बावजूद, विकास परियोजनाओं और अंधाधुंध कटाई के कारण खेजड़ी वृक्षों की संख्या में लगातार कमी आ रही है।

आंदोलन में शामिल संतों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासन और संबंधित विभाग खेजड़ी संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक खेजड़ी वृक्षों की कटाई पर रोक, संरक्षण के लिए ठोस नीति और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यह आंदोलन केवल एक वृक्ष को बचाने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास है। ठंड और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आंदोलनकारियों का हौसला बना हुआ है और वे किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं हैं।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी इस आंदोलन को मिल रहा है। कई लोग धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखा रहे हैं। वहीं प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है, जिससे आंदोलनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई है।

कुल मिलाकर, बीकानेर में चल रहा खेजड़ी संरक्षण आंदोलन राज्य में पर्यावरण सुरक्षा को लेकर एक मजबूत संदेश दे रहा है। यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन की भूमिका इस मुद्दे पर निर्णायक मानी जा रही है।

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