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केजरीवाल का आरोप: AAP के खिलाफ साजिश में मोदी और शाह की भूमिका?

केजरीवाल का आरोप: AAP के खिलाफ साजिश में मोदी और शाह की भूमिका?

शीर्षक: AAP के खिलाफ साजिश का आरोप—केजरीवाल ने मोदी और शाह पर साधा निशाना, देश से माफी की मांग

नई दिल्ली: राजधानी की राजनीति से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। अरविंद केजरीवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आम आदमी पार्टी को राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए एक सुनियोजित साजिश रची गई।

केजरीवाल ने अपने बयान में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए कहा कि दोनों वरिष्ठ नेताओं ने मिलकर उनकी पार्टी को नुकसान पहुंचाने की रणनीति बनाई। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ समय में जिस तरह की राजनीतिक और प्रशासनिक कार्रवाइयाँ हुईं, वे सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बल्कि एक बड़ी योजना का हिस्सा थीं।

“लोकतंत्र के लिए खतरनाक प्रवृत्ति”

केजरीवाल ने कहा कि अगर किसी राजनीतिक दल को खत्म करने या उसकी छवि खराब करने की कोशिश की जाती है, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के नेताओं को निशाना बनाया गया, सरकार के कामकाज में बाधाएं डाली गईं और राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की गई।

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ आम आदमी पार्टी का मामला नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे का सवाल है। अगर सत्ता में बैठे लोग विपक्ष को दबाने की कोशिश करेंगे, तो इससे लोकतंत्र कमजोर होगा।”

देश से माफी की मांग

अपने बयान में केजरीवाल ने कहा कि अगर वास्तव में उनकी पार्टी के खिलाफ साजिश रची गई है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों को देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी भी दल को खत्म करने की मानसिकता उचित नहीं है।

भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार

हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले चुनावी परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तीखी बयानबाज़ी देखने को मिल सकती है।

सियासी माहौल गरमाने के आसार

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप भारतीय राजनीति का हिस्सा रहे हैं, लेकिन जब सीधे तौर पर शीर्ष नेताओं के नाम लिए जाते हैं, तो विवाद और गहरा हो जाता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि केंद्र सरकार या भाजपा नेतृत्व इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और आगे की राजनीतिक रणनीति क्या होती है।

फिलहाल, केजरीवाल के इस बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।


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