166 जानें गयीं, मास्टरमाइंड अभी भी पाक में — 26/11 मामले में अधूरी न्याय की गुंजाइश: उज्जवल निकम
- byAman Prajapat
- 26 November, 2025
26/11 सिर्फ एक तारीख नहीं है। ये वो जख्म है जो भारत की रूह पर अब भी ताज़ा है। वो दर्द, वो खून, वो धोआँ, वो चीखें — सब आज भी मुंबई के हवा में तैरते दिख जाते हैं, बस दिल में थोड़ी चुप्पी से सुनना पड़ेगा। और इसी घाव पर फिर से बात छिड़ी है, जब विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने एक बार फिर साफ-साफ कह दिया:
“कसाब को सज़ा मिल गई, कुछ न्याय मिला… पर साज़िश रचने वाले अभी भी पाकिस्तान की जमीन पर आराम से घूम रहे हैं।”
🌆 मुंबई का वो काला दिन — जो इतिहास में जलते अक्षरों से लिखा गया
26 नवंबर 2008 की शाम।
Marine Drive की हवा usual romantic vibes nahi la rahi थी उस दिन।
Sea breeze ke saath maut ka साया भी उतर रहा था।
कराची से निकली एक नाव में बैठे 10 आतंकी, जिनकी आंखों में नफरत और दिमाग में लश्कर-ए-तैयबा की दी हुई ट्रेनिंग जल रही थी, भारत की रौनक को राख में बदलने चले आए।
ताज होटल की आग, CST की गोलियाँ, नरीमन हाउस की चीखें — भारत ने वो सब देखा जो किसी भी मुल्क का सबसे भयानक डर होता है।
और हाँ, उनमें एक था — अजमल कसाब, जो कैमरे में कैद हो गया, और जिसके ज़रिए दुनिया को साफ दिख गया कि इस हमले की स्क्रिप्ट पाकिस्तान की मिट्टी पर लिखी गई थी।
⚖️ न्याय का सफर — जो मिला, और जो नहीं मिला
उज्ज्वल निकम, वो शख्स जिसने कोर्ट में कसाब के सामने कानून की ताबीज़ नहीं झुकने दी।
उन्होंने आज फिर वही बात दोहराई जो भारत बरसों से कहता आ रहा है:
“कसाब को फांसी मिल गई, पर वो तो सिर्फ एक pawn था। असली गेम खेलने वाले पाकिस्तान में आज भी सुरक्षित घूम रहे हैं।”
और भाई, सच कहें तो ये कड़वी बात है — पर सच है।
भारत ने सबूत दिए, दस्तावेज दिए, इंटरसेप्टेड कॉल दिए — दुनिया भर को सच का पूरा blueprint दिखा दिया।
लेकिन पाकिस्तान?
वहीं वाली पुरानी cassette: “हम शामिल नहीं हैं… हमारे पास सबूत नहीं हैं…”
🇵🇰 उज्ज्वल निकम ने किसकी तरफ इशारा किया?
हाफ़िज़ सईद
ज़की-उर-रहमान लख़वी
लश्कर-ए-तैयबा के ट्रेनर्स
ISI के कुछ काले चेहरे
ये सारे नाम बरसों से 26/11 की फ़ाइल के मोस्ट-वॉन्टेड पन्नों पर चमक रहे हैं।
पर पाकिस्तान इन्हें “social worker” या “detained for formality” बताकर दुनिया को बेवकूफ बनाने की कोशिश करता है।
उज्ज्वल निकम ने बिल्कुल blunt कहा —
“पाकिस्तान के पास न political will है, न moral courage कि वो अपने ही बनाए दानवों पर कार्रवाई करे।”
🌍 दुनिया की राजनीति और 26/11 — सब अपने ही मतलब के खिलाड़ी
अंतरराष्ट्रीय मंच पर सब दो बातें कहते हैं:
1. आतंक गलत है
2. पाकिस्तान के साथ रिश्ते जरूरी हैं
बस ये ही diplomatically sugar-coated vibe चलती रहती है।
भारत जितना भी सच बोलकर चिल्लाए, दुनिया उतना ही softly सुनकर अगली मीटिंग में भुला देती है।
निकम यही बात बार-बार कहते आए हैं कि —
अगर दुनिया 9/11 को नहीं भूल सकती, तो 26/11 को भी नज़रअंदाज़ कैसे कर देती है?

🕯️ पीड़ित परिवार — जिनके लिए न्याय अभी भी आधा है
आज भी ताज होटल के बाहर खड़े होकर अगर कान लगाओ न, तो उन परिवारों की सिसकियाँ हवा में घुली महसूस हो जाएँगी।
वो कहते हैं:
“हमने अपने लोग खोए। कसाब को फांसी मिली, ठीक है।
पर जिन लोगों ने उसे भेजा — वो अभी भी जिंदा हैं।
तो क्या ये पूरा न्याय है?”
और भाई सच में, बात उनकी valid है।
🔥 भारत की एजेंसियों का स्टैंड — बहादुरी की दास्तान
मुंबई पुलिस, NSG, MARCOS — जो लोग उस रात मौत की आंधी में खड़े रहे, वो आज भी उसी जज्बे से कहते हैं:
“लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई।”
भारत की एजेंसियाँ अब पाकिस्तान पर निर्भर नहीं रहतीं।
खुद की इंटेलिजेंस, खुद की टीम, खुद की टेक्नोलॉजी — भाई, अब इंडिया पहले वाला इंडिया नहीं रहा।
🛑 पाकिस्तान की राजनीति — दो चेहरे, दो आवाज़ें
पाकिस्तान हमेशा कहता है:
“हम भी आतंकवाद से पीड़ित हैं…”
“हमने भी बहुत नुकसान झेला है…”
भाई, बात समझ में आती है, पर 26/11 के case में ये dialogues नहीं चलने वाले।
क्योंकि:
आतंकवादी उनके ही backyard में पलते हैं।
उज्ज्वल निकम ने इसी पर निशाना साधा:
“अगर पाकिस्तान चाहे तो 24 घंटे में 26/11 के मास्टरमाइंड गिरफ़्तार हो सकते हैं।
लेकिन चाहता ही नहीं।”
🧩 26/11 की जांच — सबूतों का पहाड़
भारत ने पाकिस्तान को दिए:
कॉल रिकॉर्डिंग
GPS डेटा
जहाज़ का रूट
गिरफ्तार आतंकी की गवाही
training camps की location
लश्कर handlers की आवाज़ के नमूने
दुनिया ने मान लिया कि भारत सही कह रहा है।
पर पाकिस्तान अब भी diplomatic hide-and-seek खेल रहा है।
🛡️ आज का भारत — बदला हुआ, और ज्यादा खरा
उज्ज्वल निकम ने सीधे कहा:
“अब भारत इंतजार नहीं करता।
भारत जवाब देता है।”
Uri strike, Balakot strike — ये सिर्फ नाम नहीं, ये संदेश हैं।
और ये बात पाकिस्तान भी अच्छे से समझ गया है।
🌙 फिर भी सवाल वही — पूर्ण न्याय कब?
26/11 पर आज भी एक line अधूरी है:
“मास्टरमाइंड को सज़ा मिली…”
ये line भरने में अभी वक्त है, और उसका ठेका पाकिस्तान के पास है — जो इसे अपने political shelf पर धूल खाने दे रहा है।
उज्ज्वल निकम की बात सटीक है:
“कानून का काम पूरा हुआ, अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति को ईमानदार होना पड़ेगा।”
🎯 अंत में — कहानी खत्म नहीं हुई है
26/11 की कहानियाँ आज भी Gateway of India के पीछे हवा में गूंजती हैं।
कभी धुएँ की तरह, कभी आँसू की तरह।
और भारत हर साल कहता है:
“हम भूलेंगे नहीं।
हम माफ़ नहीं करेंगे।
और हम न्याय पूरा होने तक रुकेंगे नहीं।”
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
जीणमाता मंदिर के पट...
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